कोरबा। प्री-मैट्रिक आदिवासी छात्रावास छुरी में रसोइये केसर दुबे ने कक्षा 6वीं के छात्र पुष्पेंद्र कंवर पर शनिवार को टंगिया से हमला किया। शराब के नशे में धुत रसोइये ने छात्र पर जानलेवा हमला किया, जिससे छात्र की आंख के ऊपरी हिस्से में गंभीर चोट आई है। छात्र लंबे समय से रसोइये के टॉर्चर का सामना कर रहे थे।
मारपीट और अवैध वसूली का भी आरोप है। छात्रावास अधीक्षक की शिकायत पर रसोइया केसर दुबे को कटघोरा पुलिस ने हिरासत में लिया है। छुरी नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने कोरबा ट्राइबल एसी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अशोक देवांगन पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि रसोइया के द्वारा जिस तरह से बच्चों के साथ प्रताड़ना और मारपीट की घटना को अंजाम दिया है, इसे लेकर जिला प्रशासन को भी कार्रवाई करने की जरूरत है।
वहीं एक अन्य मामले में जिले के सीमांत पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक के एक सरकारी हॉस्टल की 5 छात्राओं ने फिनाइल पी लिया। उनके द्वारा उठाए गए इस आत्मघाती कदम की जानकारी होते ही हॉस्टल में हड़कंप मच गया और इन सभी को नजदीकी सरकारी अस्पताल में ले जाया गया। हालांकि कुछ घंटे के उपचार उपरांत इन्हें छुट्टी दे दी गई और परिजन अपने साथ ले गए।
मिली जानकारी के अनुसार यह मामला पोड़ी बीईओ कार्यालय के सामने स्थित एकलव्य हॉस्टल का है। घटना 25 मार्च 2026 की बताई जा रही है। हॉस्टल में मोबाइल चलाने की बात को लेकर एक ही कक्षा की 5 छात्राओं में आपसी विवाद हुआ था। एक छात्रा को मोबाइल चलाते हुए पकड़ लेने पर उसे फटकारा गया तो उसने दूसरी छात्राओं का हवाला दिया और इस तरह यह छात्राएं आपस में ही लड़ पड़ी। कुछ देर बाद इन्होंने एक-दूसरे से क्षुब्ध हो कर आत्मघाती कदम उठाने की गरज से फिनाईल का सेवन कर लिया। इसके बाद हड़कंप मच गया। आनन-फानन में छात्राओं को उल्टी कराने की कोशिश की गई। दो छात्राओं की हालत सामान्य हुई तो इन्हें छोड़कर शेष तीन छात्राओं को तत्काल शाम करीब 7 बजे स्थानीय सरकारी अस्पताल ले जाया गया।
बताया जा रहा है कि यहां रात भर इन्हें भर्ती रखा गया और दूसरे दिन हालत में सुधार होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इस घटना की जानकारी छात्राओं के परिजनों को दे दी गई थी जो अस्पताल पहुंचे थे और डिस्चार्ज होने के बाद इन्हें अपने साथ ले गए। इस मामले को पूरी तरह से दबाने और छुपाने की कोशिश भी की गई है। हॉस्टल में लगातार सामने आ रही घटनाओं से ऐसा लगता है कि अब प्रशासन के द्वारा हॉस्टलों में निगरानी बढ़ाई जाए और समय-समय पर वहां रह रहे छात्राओं से फीडबैक लेने की भी जरूरत है।







