रांची। सावन माह की शुरुआत के साथ झारखंड के विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बिहार के सुल्तानगंज से देवघर तक 108 किलोमीटर लंबे कांवर पथ पर लाखों कांवड़िए जल लेकर पहुंचे। इस बार श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए AI निगरानी, ड्रोन और फेसियल रिकग्निशन कैमरों की व्यवस्था की गई है।
भगवान शिव का पवित्र महीना सावन शुरू हो चुका है और हर तरफ माहौल बम भोलेनाथ के साथ शिवमय नजर आ रहा है। बाबानगरी देवघर में आस्था, विश्वास, उमंग और उल्लास का संगम दिख रहा है। यहां 30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत भी हो चुकी है।
बिहार-झारखंड के सीमा पर स्थित दुम्मा में वैदिक मंत्रोचार के बीच विधि-विधान के साथ इस मेले की शुरुआत हुई और उसके बाद कावंरियों का जत्था बाबाधाम की ओर बढ़ने लगा। अब अगले एक माह तक बाबा वैद्यनाथ की नगरी देवघर में हर हर महादेव और बाबा भोलेनाथ की गूंज रहेगी। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ की महिमा अपरमपार है। यहां ऐसे तो सालों भर भक्तों का मेला लगता है लेकिन श्रावन महीने में यह आंकड़ा करोड़ों तक पहुंच जाता है।
बाबा बैद्यनाथ मंदिर भगवान शिव के पवित्र 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के साथ-साथ एक अत्यंत पावन शक्तिपीठ भी है। इस मेले की अनूठी विशेषता इसकी कांवड़ यात्रा है, जिसके कई रंग हैं, जो आस्था और कठिन तपस्या का बेजोड़ उदाहरण भी है। यहां बिहार के सुल्तानगंज के उत्तर वाहिनी गंगा से जल लेकर 108 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर कांवरिया बाबा धाम पहुंच रहे हैं औऱ बाबा बैद्यनाथ पर जलार्पण कर रहे हैं। केसरिया वस्त्र धारण किए लाखों कांवड़िए सुल्तानगंज से देवघर तक लगभग 108 किलोमीटर की दूरी नंगे पैर तय करते हैं। इस दौरान नियमों का कड़ा पालन किया जाता है। इस पूरी यात्रा के दौरान कांवड़ को जमीन पर रखने की मनाही होती है। रास्ते भर सिर्फ “बोल बम” का मंत्र गूंजता रहता है। देवघर पहुंचने के बाद श्रद्धालु पवित्र शिवगंगा में डुबकी लगाकर खुद को शुद्ध करते हैं और फिर कतारबद्ध होकर ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस पावन महीने में जल चढ़ाने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
सुविधाजनक और सुरक्षित पूजा के प्रबंध : भीड़ को नियंत्रित करने और सुचारू दर्शन सुनिश्चित करने के लिए, मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार ने इस साल कुछ कड़े और महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब यहां अगले एक महीने तक भक्तों के लिए श्रावणी मेले के दौरान गर्भगृह में बाबा के ज्योतिर्लिंग को छूकर पूजा करने यानि स्पर्श पूजा पर पूरी तरह रोक रहेगी और अरघा के माध्यम से ही भक्त बाबा भोलेनाथ पर जलार्पण कर सकेंगे, ताकि सुगम तरीके से कांवरिए भगवान भोलेनाथ तक अपनी अर्जी पहुंचा सके। पहले दिन देर रात से ही बाबा के भक्त जलार्पण के लिए कतारबद्ध होने शुरू हो गए और देखते ही देखते बाबा बैद्यनाथ मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।
VIP पास की व्यवस्था : जो श्रद्धालु लंबी कतारों से बचकर जल्दी दर्शन करना चाहते हैं, उनके लिए शीघ्रदर्शनम (VIP पास) कूपन का शुल्क 300 से बढ़ाकर 600 रुपये प्रति व्यक्ति कर दिया गया है। अत्यधिक भीड़ के कारण रविवार और सोमवार को यह वीआईपी व्यवस्था बंद रहेगी। साथ ही मंदिर परिसर की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस बार श्रद्धालुओं के मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू किया गया है।
11 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती : पूरे मेला क्षेत्र और देवघर-दुमका में साढ़े 11 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए 100 से अधिक अस्थायी चौकियां बनाई गई हैं। इतना ही नहीं इस बार एआई का इस्तेमाल करते हुए चौबीसों घंटे निगरानी की व्यवस्था के लिए इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। दुम्मा बॉर्डर से लेकर मंदिर तक पूरे रूटलाइन पर बाबा के भक्तों की सुविधा के लिए जर्मन हैंगर शेड, बड़े पंखे, नि:शुल्क पेयजल, चौबीसों घंटे चिकित्सा शिविर, स्नानागार, और ठहरने के लिए आधुनिक टेंट सिटी बनाई गई हैं। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस बार देवघर को ‘नो प्लास्टिक’ जोन बनाने का संकल्प लिया गया है।

रोशनी से जगमगा उठी बाबा नगरी : श्रावणी मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की स्वागत में देवघर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। टावर चौक, शिवराम झा चौक, देवघर रेलवे स्टेशन समेत बाबानगरी के सभी प्रमुख चौक चौराहौं और सरकारी भवनों को आकर्षक रंग-बिरंगी एलईडी लाइटों से रोशन किया गया है। शाम ढलते ही पूरी देवघर नगरी एक अलौकिक और दिव्य आध्यात्मिक रूप ले लेती है, जो श्रद्धालुओं के मन को मोह रही है।
बाबा बैद्यनाथ धाम का यह श्रावणी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, और मानवीय सीमाओं को लांघती तपस्या का अद्भुत उत्सव है। इस वर्ष प्रशासन के हाई-टेक इंतजामों और भक्तों के अगाध विश्वास के मेल से यह महासमागम और भी अधिक सुरक्षित, सुगम और अलौकिक बन पड़ा है।







