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दिल्ली-NCR में तेजी से पैर फैला रहा स्वाइन फ्लू! क्या होता है H1N1 और किन लोगों को ज्यादा खतरा

दिल्ली-NCR समेत कई इलाकों में इस साल स्वाइन फ्लू के मामलों में बड़ा इजाफा हुआ है। वहीं उज्जैन की 62 वर्षीय महिला की H1N1 संक्रमण के बाद मौत हुई है। H1N1 एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करता है।

एक महिला की हुई है मौत :   मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने उज्जैन की 62 वर्षीय महिला की मौत के मामले में जांच शुरू कर दी है। महिला का इंदौर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था और उसकी H1N1 रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जिसे स्वाइन फ्लू भी कहा जाता है। 18 अगस्त को डॉक्टरों की सलाह के खिलाफ वह अस्पताल से घर लौट आई थी और अगले दिन उज्जैन में उसकी मौत हो गई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को नोटिस जारी किया और पूरे मामले की जांच के लिए एक्सपर्ट की टीम बनाई।

क्या होता है H1N1 :   H1N1, इन्फ्लूएंजा A वायरस का एक प्रकार है। 2009 में फैली महामारी के लिए जिम्मेदार A(H1N1)pdm09 स्ट्रेन अब मौसमी फ्लू के रूप में फैलता है। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, बोलने या सांस लेने से निकलने वाली बूंदों के जरिए दूसरे लोगों तक पहुंच सकती है। इसके नॉर्मल लक्षणों में अचानक बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, थकान और शरीर में दर्द शामिल हैं। कुछ मामलों में उल्टी या दस्त की समस्या भी हो सकती है।

कितने दिन में ठीक होती है बिमारी :   H1N1 से संक्रमित ज्यादातर लोग करीब एक हफ्ते में ठीक हो जाते हैं, लेकिन खांसी कुछ समय तक बनी रह सकती है। लेकिन कुछ लोगों के लिए यह इंफेक्शन गंभीर रूप ले सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, खासतौर पर कुछ जोखिम वाले लोगों को इससे अधिक सावधान रहने की जरूरत होती है। H1N1 के लिए कोई तय स्टेज नहीं है।

निमोनिया की बन सकती है वजह :   H1N1 का संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचकर वायरल निमोनिया का कारण बन सकता है। इससे फेफड़ों में सूजन और तरल पदार्थ जमा हो सकता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। ऐसी हालत में मरीज को अस्पताल में भर्ती करने के साथ ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ सकती है और गंभीर मामलों में वेंटिलेटर का सहारा भी लेना पड़ सकता है। कुछ मामलों में मरीज की हालत शुरू में बेहतर होने के बाद फिर बिगड़ सकती है और बैक्टीरियल निमोनिया भी हो सकता है। अगर बुखार या खांसी ठीक होने के बाद दोबारा बढ़ने लगे, तो इसे गंभीर संकेत माना जा सकता है और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

किन लोगों को होता है ज्यादा खतरा :  गंभीर इन्फ्लूएंजा का खतरा हर किसी को हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसकी संभावना ज्यादा रहती है। इनमें 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग, 5 साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और अस्थमा या फेफड़ों की पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोग शामिल हैं। इसके अलावा दिल, किडनी, लिवर, न्यूरोलॉजिकल समस्या या डायबिटीज वाले लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है। कैंसर के मरीज, कीमोथेरेपी करा रहे लोग, कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्ति और कई पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों में भी गंभीर संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है।

इन लक्षणों पर दें ध्यान :  अगर फ्लू के लक्षण बढ़ रहे हों या मरीज की हालत बिगड़ रही हो, तो इसे सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सांस लेने में परेशानी, सीने या पेट में लगातार दर्द, चक्कर, भ्रम, दौरे, बहुत ज्यादा कमजोरी या पेशाब कम होना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ठीक होने के बाद बुखार या खांसी का दोबारा बढ़ना भी चिंता की बात है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

डॉक्टर से सलाह लेना जरुरी :   फ्लू के गंभीर खतरे वाले लोगों को लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर एंटीवायरल दवाएं दे सकते हैं, जिन्हें बीमारी की शुरुआत में लेना ज्यादा फायदेमंद होता है। H1N1 और फ्लू से बचने के लिए हर साल फ्लू की वैक्सीन लगवाना, हाथ साफ रखना, खांसते-छींकते समय मुंह ढकना और बीमार लोगों से दूरी बनाना जरूरी है। अगर सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, उलझन या ठीक होने के बाद लक्षण दोबारा बढ़ें, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।

डिस्क्लेमरयह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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