बदलती जीवनशैली , बढ़ता प्रदूषण और भागदौड़ भरी जिंदगी का असर हमारी सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को अक्सर लोग रोजमर्रा की थकान या मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। खांसी भी ऐसी ही एक आम परेशानी है, जिसे लोग सामान्य समझकर टाल देते हैं। लेकिन जब यही खांसी लंबे समय तक बनी रहे, तो यह किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के कई शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग समय पर ध्यान नहीं दे पाते।
एक सामान्य सी लगने वाली खांसी कभी-कभी शरीर का बड़ा संकेत हो सकती है। इसलिए लंबे समय तक रहने वाली खांसी को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच करवाना बेहतर है।
ऐसे में अपनी दिनचर्या, खानपान और शरीर में होने वाले बदलावों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है। सही समय पर जांच और सावधानी से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम किया जा सकता है।
लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी हो सकती है घातक : विशेषज्ञों की मानें तो लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी फेफड़ों के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकती है। हालांकि हर पुरानी खांसी कैंसर नहीं होती, लेकिन कई हफ्तों तक इसे नजरअंदाज करने से बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है, जिससे इलाज के विकल्प प्रभावित हो सकते हैं। एक्सपर्ट बताते हैं फेफड़ों में मौजूद कुछ कोशिकाएं जब अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो ट्यूमर बन सकता है और यही आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकता है।
सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही नहीं होता खतरा : आम धारणा है कि फेफड़ों का कैंसर केवल धूम्रपान करने वालों को होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, धूम्रपान इसका सबसे बड़ा कारण जरूर है, लेकिन इसके अलावा कई दूसरी चीजें भी जोखिम बढ़ा सकती हैं। इनमें शामिल हैं:
- दूसरे लोगों के धुएं के संपर्क में आना (सेकेंड हैंड स्मोक)
- बढ़ता वायु प्रदूषण
- रेडॉन गैस
- एस्बेस्टस जैसे खतरनाक पदार्थ
- कुछ हानिकारक केमिकल्स
इसके अलावा, जिन लोगों के परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है या कुछ जेनेटिक बदलाव हैं, उनमें भी खतरा हो सकता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे लग सकते हैं। यही वजह है कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है:
- 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक रहने वाली खांसी
- खांसी के साथ खून आना
- सीने में लगातार दर्द रहना
- सांस लेने में परेशानी या घरघराहट
- बार-बार छाती में संक्रमण होना
- बिना वजह वजन कम होना
- भूख कम लगना
- लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना
- आवाज में भारीपन या बदलाव लंबे समय तक रहना
इनमें से कोई भी लक्षण दिखने का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन अगर ये लंबे समय तक बने रहें तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
इलाज में देरी से बढ़ सकता है खतरा : अगर फेफड़ों के कैंसर का समय पर इलाज न हो, तो यह शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे दिमाग, हड्डियों, लीवर और एड्रिनल ग्लैंड तक फैल सकता है। इससे तेज दर्द, सांस लेने में ज्यादा परेशानी, हड्डियों में फ्रैक्चर और जीवन की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
समय पर इलाज से बच सकती है जान : मेडिकल क्षेत्र में हुई प्रगति के कारण अब फेफड़ों के कैंसर के इलाज के कई बेहतर विकल्प मौजूद हैं। मरीज की स्थिति के अनुसार सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें :
फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं:
- धूम्रपान से दूरी बनाएं
- दूसरों के धुएं से बचें
- प्रदूषण और खतरनाक केमिकल्स से बचाव करें
- जरूरत पड़ने पर मास्क और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें
- संतुलित भोजन लें
- समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाते रहें
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।







