लगातार दो बार ओलंपिक मेडल जीतने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम शनिवार को वेल्स के खिलाफ अपने वर्ल्ड कप अभियान की शुरुआत करेगी। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में टीम 51 साल से चले आ रहे वर्ल्ड कप मेडल के सूखे को खत्म करने के मकसद से मैदान पर उतरेगी। भारत जीत के साथ टूर्नामेंट की शुरुआत करने और देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस का तोहफ़ा देने की कोशिश करेगा।
भारत ने 1975 में कुआलालंपुर में पाकिस्तान को हराकर अपना एकमात्र विश्व कप खिताब जीता था। इससे पहले टीम ने 1971 में कांस्य और 1973 में रजत पदक हासिल किया था। हालांकि, इसके बाद पिछले 51 वर्षों में भारतीय टीम विश्व कप के पोडियम तक नहीं पहुंच सकी है।
बता दें 2026 FIH हॉकी वर्ल्ड कप में पुरुष और महिला दोनों टूर्नामेंट शामिल हैं। इसकी संयुक्त मेजबानी बेल्जियम के वावरे और नीदरलैंड्स के एमस्टेलवीन शहर 15 से 30 अगस्त के बीच करेंगे।
भारत के पास पदक जीतने का सुनहरा मौका
- विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा भारतीय टीम के पास इस बार पदक जीतने का मजबूत मौका है। विश्व रैंकिंग में आठवें स्थान पर मौजूद भारत के पूल में उससे ऊपर सिर्फ तीसरे नंबर की इंग्लैंड टीम है। पाकिस्तान 12वें और वेल्स 15वें स्थान पर है।
- टूर्नामेंट के नए प्रारूप में प्रत्येक पूल से शीर्ष दो टीमें अगले दौर में पहुंचेंगी। दूसरे चरण में आठ टीमों को चार-चार के दो समूहों में बांटा जाएगा। यहां प्रत्येक टीम दूसरे पूल से आने वाली टीमों के खिलाफ खेलेगी। दोनों समूहों की शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी।
ओलंपिक वाला जज्बा लेकर उतरेगी टीम
- भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा है कि टीम उसी मानसिकता और तैयारी के साथ विश्व कप में उतरेगी, जिसके साथ उसने पिछले दो ओलंपिक में सफलता हासिल की थी।
- उन्होंने कहा कि जिस तरह टोक्यो ओलंपिक में भारत ने 41 साल बाद पदक जीता था, उसी तरह टीम इस बार विश्व कप में 51 साल का इंतजार खत्म करने के लिए तैयार है।
- हरमनप्रीत के मुताबिक टीम पर पदक जीतने का दबाव नहीं है, बल्कि यह उसकी जिम्मेदारी है।
- कप्तान ने कहा कि टीम ने शीर्ष टीमों के खिलाफ लगातार मुकाबले खेले हैं और युवा खिलाड़ी भी आत्मविश्वास से भरे हुए हैं।
- पिछले कुछ टूर्नामेंटों में भारत के फील्ड गोल करने के प्रदर्शन को भी उन्होंने सकारात्मक पहलू बताया।







