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सावन शिवरात्रि कल, रहेगा भद्रा का साया, जान लें शिवलिंग पर जलाभिषेक का सबसे शुभ समय

मंगलवार को सावन की शिवरात्रि मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में सावन के महीने का जितना महत्व है, उतनी ही महानता इस माह में आने वाली शिवरात्रि की भी है।  यह दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन इस साल सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया है जिसके वजह से लोगों के मन में यह सवाल है कि इस दिन शिवलिंग पर किस समय जल चढ़ाना शुभ होगा।

शिवभक्तों के लिए यह दिन अत्यंत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि के दिन व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक करने से भक्तों को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही व्यक्ति के जीवन के सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं। सावन शिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक कराना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कि सावन शिवरात्रि के दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा। साथ ही जानेंगे कि सावन शिवरात्रि की पूजा किस विधि-विधान के साथ करना चाहिए।

सावन शिवरात्रि शुभ मुहूर्त 2026 :  पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर होगा। चतुर्दशी तिथि का समापन 12 अगस्त को सुबह 1 बजकर 52 मिनट पर होगा। सावन शिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 49 मिनट से होगा और समाप्त सुबह 5 बजकर 34 मिनट पर होगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। वहीं निशिता काल पूजा समय 12:21 ए एम से 01:06 ए एम, अगस्त 12 तक रहेगा। सावन शिवरात्रि का पारण 12 अगस्त 2026 को किया जाएगा। पारण के लिए शुभ समय 12:21 ए एम से 01:06 ए एम तक रहेगा।

सावन शिवरात्रि चार प्रहर पूजा मुहूर्त

  • रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 07:09 पी एम से 09:56 पी एम
  • रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 09:56 पी एम से 12:44 ए एम, अगस्त 12
  • रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 12:44 ए एम से 03:31 ए एम, अगस्त 12
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 03:31 ए एम से 06:19 ए एम, अगस्त 12

सावन शिवरात्रि पूजा विधि

  • सावन शिवरात्रि के दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहन लें।
  • इसके बाद मंदिर या भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें।
  • अब शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें और अंत में फिर से गंगाजल या शुद्ध जल चढ़ाएं।
  • जलाभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल, शमी के पत्ते, चंदन, आक के फूल, भस्म और अक्षत (चावल) अर्पित करें।
  • पूजा के दौरान निरंतर ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें।
  • फिर शिवलिंग के सामने धूप-दीप जलाकर शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें।

सावन शिवरात्रि के दिन इन बातों का रखें ध्यान

  • सावन शिवरात्रि के दिन लहसुन, प्याज और अन्य तामसिक चीजों से दूर रहें।
  • सावन शिवरात्रि व्रत में नमक और अन्न का सेवन न करें। फल, दूध और सात्विक आहार ही खाएं।
  • अगर संभव हो तो शिवरात्रि की रात रात्रि जागरण कर शिव मंत्रों का जाप करें। ऐसा करने अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • सावन शिवरात्रि व्रत का पारण दूसरे दिन करें। पारण का अर्थ है व्रत खोलना।

 

डिस्क्लेमर :  उक्त लेख धार्मिक आस्था व लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए  Today Studio उत्तरदायी नहीं है।

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