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स्वास्थ्य

साइलेंट किलर है विटामिन B12 की कमी: इन 5 चेतावनी संकेतों को न करें नजरअंदाज

बढ़ सकता है नसों के स्थायी नुकसान का खतरा

Health Care : शरीर को दुरुस्त और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए विटामिन B12 एक अनिवार्य पोषक तत्व है। यह लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) के निर्माण, डीएनए (DNA) के संश्लेषण और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को सुचारू रूप से चलाने में प्रमुख भूमिका निभाता है। इसकी कमी के शुरुआती लक्षण काफी सामान्य होते हैं, जिन्हें लोग अक्सर थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, लंबे समय तक इसकी अनदेखी नसों और मस्तिष्क को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

विटामिन B12 की कमी के 5 मुख्य संकेत:

जीभ लाल, चिकनी और दर्दनाक होना: B12 की कमी का असर मुंह में दिखता है। जीभ की ऊपरी सतह चिकनी हो जाती है, उसमें सूजन व जलन महसूस होती है। इसे ‘ग्लोसाइटिस’ कहा जाता है। मुंह में बार-बार छाले होना भी इसका लक्षण है।

लगातार थकान और कमजोरी: शरीर में पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाएं न बनने से ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे ‘मेगालोब्लास्टिक एनीमिया’ हो सकता है। पर्याप्त नींद के बाद भी सुस्ती और चक्कर आना इसी के संकेत हैं।

हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन: नसों की सुरक्षा प्रणाली B12 पर निर्भर करती है। इसकी कमी से हाथ-पैरों में सुई चुभने जैसा अहसास, जलन या सुन्नपन होने लगता है। खास बात यह है कि यह लक्षण बिना एनीमिया के भी दिखाई दे सकता है।

याददाश्त और एकाग्रता में कमी: मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित होने से ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, भूलने की समस्या और मानसिक भ्रम की स्थिति बनती है।

शरीर का संतुलन बिगड़ना: नसों को नुकसान पहुंचने से चलते समय लड़खड़ाहट होना, बार-बार ठोकर लगना या शारीरिक समन्वय बिगड़ने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

किन्हें है सबसे ज्यादा खतरा? 

शाकाहारी आहार में B12 के प्राकृतिक स्रोत सीमित होते हैं, क्योंकि यह मुख्य रूप से पशु-आधारित खाद्य पदार्थों (मांस, मछली, अंडे, दूध) में पाया जाता है। इसके अलावा बढ़ती उम्र, पेट या आंत से जुड़ी बीमारियों और पाचन संबंधी सर्जरी के कारण भी शरीर B12 को अवशोषित नहीं कर पाता।

जांच और सही डॉक्टरी सलाह जरूरी: लक्षण दिखने पर खुद से दवाइयां या सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श करके ब्लड टेस्ट (B12 Level & CBC) कराना चाहिए। यदि कमी केवल आहार के कारण है तो डाइट और सप्लीमेंट्स से सुधार संभव है, लेकिन अवशोषण की समस्या होने पर इंजेक्शन की आवश्यकता हो सकती है। समय पर इलाज न मिलने से तंत्रिका तंत्र को होने वाला नुकसान स्थायी हो सकता है।

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