नई दिल्ली। भारत के सामने युवाओं को शिक्षा से रोजगार की ओर ले जाने की बड़ी चुनौती है। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 15 से 29 साल की उम्र के करीब 8.7 करोड़ युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी तरह का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
इन्हें एनईईटी (नाट इन एजुकेशन, एम्प्लायमेंट एंड ट्रेनिंग) श्रेणी में रखा गया है। हालांकि यह आंकड़ा 2021 के नेशनल सैंपल सर्वे के 78वें दौर के आंकड़ों पर आधारित है और इसे मौजूदा 2026 की स्थिति नहीं माना जा सकता।
नीति आयोग ने ‘रीइमैजिनिंग स्किलिंग फार विकसित भारत/2047’ रिपोर्ट में कहा है कि देश के स्किलिंग माडल को केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजगार, कमाई और करियर में आगे बढ़ने से जोड़ना होगा।
इसके लिए एनईईटी युवाओं और महिलाओं को सस्ते या सब्सिडी वाले प्रशिक्षण विकल्प उपलब्ध कराने के साथ जरूरत के मुताबिक वित्तीय सहायता देने की सिफारिश की गई है।
88 प्रतिशत युवा घरेलू जिम्मेदारियों में
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एनईईटी श्रेणी में शामिल युवाओं को केवल बेरोजगार मानना सही नहीं होगा। उपलब्ध विश्लेषण के अनुसार, इस समूह के करीब 88 प्रतिशत युवा घरेलू जिम्मेदारियों में लगे हुए हैं। ऐसे में उनके लिए नियमित समय और स्थान पर चलने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बजाय अधिक लचीले विकल्प विकसित करने की जरूरत है।







