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विजयादशमी : कुछ ही घंटों बाद किया जाएगा रावण के पुतले का दहन, जानें शुभ मुहूर्त

दशहरे का महापर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानकर मनाया जाता है। इस साल दशहरा 2 अक्टूबर यानी आज मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं कि इस साल विजयादशमी पर कौन से शुभ मुहूर्त बन रहे हैं।

रामायण की कथा अनुसार भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और उसी दिन से दशहरा मनाने की परंपरा शुरू हुई। इस दिन पूरे देश में रावण के पुतले दहन किए जाने की परंपरा है। जो हमें संदेश देते हैं कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है। दशहरा के दिन रावण दहन से पहले भगवान राम की विधि विधान पूजा के साथ उनकी आरती भी की जाती है। पंचाग के अनुसार आश्विन मास की दशमी तिथि 1 अक्टूबर यानी कल 7 बजकर 01 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 2 अक्टूबर यानी आज शाम 7.10 मिनट पर होगा।

रावण दहन का मुहूर्त – दशहरा या कहें विजयादशमी के दिन रावण दहन हमेशा प्रदोष काल में किया जाता है। प्रदोष काल का समय सूर्यास्त के बाद शुरू होता है। आज सूर्यास्त का समय 6 बजकर 05 मिनट पर शुरू होगा और इसके बाद से रावण दहन भी शुरू हो जाएगा।

दशहरा का महत्व – यह त्यौहार हमें धैर्य, साहस और धर्म की रक्षा का महत्व भी सिखाता है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में दशहरा अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। कहीं रामलीला का मंचन होता है तो कहीं दुर्गा पूजा का समापन इसी दिन होता है। यह पर्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।

श्री राम जी की आरती 

श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं ।

नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं ।

पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नोमि जनक सुतावरं ॥२॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं ।

रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥

शिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।

आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं ।

मम् हृदय कंज निवास कुरु कामादि खलदल गंजनं ॥५॥

मन जाहि राच्यो मिलहि सो वर सहज सुन्दर सांवरो ।

करुणा निधान सुजान शील स्नेह जानत रावरो ॥६॥

एहि भांति गौरी असीस सुन सिय सहित हिय हरषित अली।

तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥

॥सोरठा॥

जानी गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि ।

मंजुल मंगल मूल वाम अङ्ग फरकन लगे।

दशहरा का पूजा मंत्र 

  • राम रामाय नम:
  • ॐ अपराजितायै नमः
  • ॐ विजयायै नमः

 

डिस्क्लेमर : उक्त लेख धार्मिक व लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकताए संपूर्णता के लिए  Today Studio उत्तरदायी नहीं है।

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