नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी मुसीबत खत्म होने के कगार पर है। अमेरिका और ईरान के बीच जंग थम गई है। दोनों ही देशों ने डील का ऐलान कर दिया है। व्हाइट हाउस से सफेद धुआं देखा गया जो कि परंपरा के मुताबिक ये कन्फर्मेशन होता है कि शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शांति समझौते का स्वागत किया है।
पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ”मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं। इस संघर्ष के कारण दुनिया भर में गंभीर आर्थिक उथल-पुथल हुई है और कई देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है।”
I welcome the understanding reached between the United States and Iran on ending the conflict in West Asia, which has caused serious economic disruption across the world and led to loss of life in many countries.
India hopes that the implementation of this understanding will…
— Narendra Modi (@narendramodi) June 15, 2026
ट्रंप ने क्या दावा किया? : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान के साथ समझौता हो गया है। ईरान ने भी बयान जारी किया कि अमेरिका के साथ कई महीनों की लंबी और मुश्किल बातचीत के बाद दोनों देशों ने सीजफायर के MoU को अंतिम रूप दे दिया है। ट्रम्प ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा। उन्होंने ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तुरंत हटाने की मंजूरी दे दी है। अमेरिका और ईरान दोनों 14 शर्तों पर राजी हुए हैं। दोनों देश 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में पीस डील पर दस्तखत करेंगे।
तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पहली हाई लेवल मीटिंग : बता दें कि अगर जेनेवा में डील साइन हो गई तो 47 साल में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच ये पहली हाई लेवल की मीटिंग होगी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि सबसे पहले अमेरिका को अगर शांति समझौता कायम रखना है तो 3 मेन स्टेप लेने होंगे। नौसैनिक नाकेबंदी खत्म की जाए। युद्ध और सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोका जाए, ईरान के फ्रीज्ड फंड रिलीज हों।
तेल पर लगी पाबंदियां हटें और नाकेबंदी की जाए खत्म : इस बीच ईरानी मीडिया ने अमेरिका के साथ डील में 14 शर्तों के बारे में खबरें प्रसारित की हैं। ईरानी मीडिया की खबरों के अनुसार, 14 शर्तों में अंतिम बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक कि 12 अरब डॉलर जारी नहीं हो जाते, तेल पर लगी पाबंदियां हट नहीं जातीं और नाकेबंदी खत्म नहीं हो जाती।







