मंडी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी ) की क्रिप्टो करेंसी धोखाधड़ी मामले में दूसरे दिन भी कार्रवाई जारी रही। जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत पंजाब के जीरकपुर के प्रापर्टी डीलर विजय जुनेजा और उसके बेटे मासूम जुनेजा के ठिकानों पर सोमवार को दबिश दी। कार्रवाई के दौरान ईडी ने इस वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिन्हें मामले में अहम सबूत माना जा रहा है। इसके साथ ही, अपराध की कमाई को खपाने और जांच में सहयोग न करने के आरोप में आरोपी मासूम जुनेजा को गिरफ्तार कर लिया गया है।
ईडी ने यह जांच हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस द्वारा मुख्य आरोपित सुभाष शर्मा और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच में सामने आया कि साल 2018 में सुभाष शर्मा ने अपने सहयोगियों (हेम राज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा और राधिका शर्मा) के साथ मिलकर कोर्वियो काइन नाम से एक फर्जी क्रिप्टो करेंसी आधारित एमएलएम (मल्टी-लेवल मार्केटिंग) स्कीम शुरु की थी। मासूम और विजय जुनेजा इसी सिंडिकेट के अहम हिस्से थे, जिनके खातों में निवेशकों से जुटाया गया करोड़ों का कैश ट्रांसफर किया गया था।
शातिर ठगों ने लुभावने सेमिनार आयोजित कर और भारी रिटर्न का झांसा देकर देश भर के करीब 2.48 लाख से अधिक भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाया। यह पूरा तंत्र एक पोंजी स्कीम की तरह काम कर रहा था, जिसमें नए निवेशकों के पैसों से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था। इस रैकेट के जरिए करीब 2300 करोड़ रुपये का वित्तीय हेरफेर किया गया। पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने अपने डिजिटल रिकॉर्ड और डोमेन डिलीट कर दिए थे और मुख्य आरोपित सुभाष शर्मा दुबई फरार हो गया।
विजय और मासूम जुनेजा ने निवेशकों से मिले कैश का इस्तेमाल महंगी अचल संपत्तियां खरीदने में किया। इन संपत्तियों की रजिस्ट्री वास्तविक मूल्य से काफी कम कीमत पर दिखाई गई, जबकि बाकी का भारी-भरकम भुगतान नकद (कैश) में किया गया। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि दोनों आरोपी कई बेनामी और कर्मचारियों के नाम पर खुले खातों को खुद संभाल रहे थे, जिनका उपयोग पैसे की लेयरिंग (इधर-उधर घुमाने) के लिए किया जा रहा था। ईडी अब मासूम जुनेजा को रिमांड पर लेकर इस महाघोटाले की पूरी कड़िय़ों को जोड़ऩे और अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।







