28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह त्योहार भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, स्नेह और अटूट विश्वास का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन की पूजा और राखी बांधने का कार्य यदि सही विधि और शुभ मुहूर्त में किया जाए, तो भाई-बहन के रिश्ते में मजबूती आती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
राखी बांधने के 7 महत्वपूर्ण नियम
- सही दिशा का चुनाव- राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। बहन को पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके बैठना शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि भाई का मुख कभी भी दक्षिण दिशा की ओर न हो।
- सिर ढकना अनिवार्य- धार्मिक कार्यों में खाली सिर बैठना वर्जित माना गया है। इसलिए राखी बांधते और बंधवाते समय भाई-बहन दोनों को अपना सिर टोपी, चुन्नी या रुमाल से ढकना चाहिए।
- अक्षत और रोली का तिलक- राखी बांधने से पूर्व भाई के माथे पर रोली या चंदन का तिलक लगाएं और उस पर अक्षत (चावल) लगाएं। ध्यान रहे कि चावल के दाने बिल्कुल साबुत (अखंडित) होने चाहिए, टूटे हुए चावल का प्रयोग न करें।
- दाहिने हाथ की कलाई- शास्त्रों में शुभ कार्यों के लिए दाहिना हाथ ही श्रेष्ठ और पवित्र माना गया है। इसलिए राखी हमेशा भाई की दाहिनी कलाई पर ही बांधनी चाहिए।
- तीन गांठें लगाएं- कलाई पर रक्षासूत्र बांधते समय 3 गांठें लगाना शुभ माना जाता है। ये तीन गांठें ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिदेव) का प्रतीक मानी जाती हैं।
- आरती उतारें- राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें। माना जाता है कि आरती करने से भाई पर आने वाली सभी नकारात्मक शक्तियां और बुरी नजर दूर होती हैं।
- मुंह मीठा कराएं- आरती के बाद भाई को प्यार से मिठाई खिलाकर उसका मुंह मीठा कराएं और भाई अपनी बहन को अपनी सामर्थ्य अनुसार उपहार (गिफ्ट) दें।







