नई दिल्ली। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को भारतीय पत्रकारों के साथ वर्चुअल बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाला है।
प्रवक्ता ने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के लिए द्विपक्षीय संबंधों के मुद्दों पर चर्चा करने का एक मौका है। उन्होंने शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत को सफलता की शुभकामनाएं भी दीं। इससे पहले 31 अगस्त को भी पीएम मोदी और पुतिन ने किर्गिस्तान के बिश्केक में SCO समिट के दौरान बातचीत की थी।
उन्होंने आगे कहा, “हमें कोई संदेह नहीं है कि शिखर सम्मेलन सफल होगा। रूस के तौर पर, हम अपने आपसी सहयोग के तीन मुख्य स्तंभों – नीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वित्त तथा सांस्कृतिक और मानवीय संदर्भ में ब्रिक्स सहयोग को और विकसित करने में योगदान देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इसलिए, हम ब्रिक्स के विभिन्न स्वरूपों में शामिल होने के लिए नए देशों को आमंत्रित करने के विचार का समर्थन कर रहे हैं।”
18वां BRICS शिखर सम्मेलन
दरअसल, भारत 12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। यह तेजी से आगे बढ़ रहे प्रमुख उभरते बाजार वाले देशों और विकासशील देशों के अंतर-सरकारी मंच के लिए एक अहम पल होगा। भारत ने इस साल 1 जनवरी को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली, जो इस समूह की कमान संभालने का उसका चौथा मौका है। साल 2026 ब्रिक्स की स्थापना के 20 साल पूरे होने का भी प्रतीक है।
शुरुआत में यह ब्राजील, रूस, भारत और चीन का ‘ब्रिक’ (BRIC) गठबंधन था। इसने 2006 में न्यूयॉर्क में UN महासभा के दौरान अपने विदेश मंत्रियों की पहली बैठक की और 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में अपना पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया। बाद में, 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह समूह ‘ब्रिक्स’ (BRICS) बन गया।







