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छत्तीसगढ़

बारिश से पहले बिना सूचना के मकान ध्वस्त करने का आरोप-ग्रामीणों में भारी आक्रोश

महिलाओं से मारपीट व दुर्व्यवहार का भी आरोप, आंदोलन की चेतावनी

कोरबा। जिले के पाली थाना अंतर्गत ग्राम नोनबिर्रा (खलारीपारा) में विरोध बढ़ गया है। गरीबों के आशियाने को बारिश से पहले बिना सूचना तोड़े जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के कर्मचारियों ने स्थानीय पुलिस बल के साथ मिलकर ग्राम नोनबिर्रा के गरीब आदिवासियों के पक्के व कच्चे मकानों को बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के जेसीबी मशीनों से जबरन ध्वस्त कर दिया।

ग्रामीणों ने बताया कि कार्यवाही के दौरान न केवल ग्रामीणों के घरों को तोड़ा गया, बल्कि विरोध करने पर घर में अकेली मौजूद महिलाओं के साथ पुलिस और वन विभाग के कर्मियों द्वारा बर्बरतापूर्वक हाथापाई की गई। उन्हें घसीटकर बाहर निकाला गया। जिससे कई महिलाओं के हाथ और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं। घटना को लेकर पाली थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए पीड़ित ग्रामीणों ने न्याय और मुआवजे की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए विवश होंगे।

ग्रामीणों ने कहा कि पीड़ित ग्रामीण गोंड जनजाति (आदिवासी वर्ग) से ताल्लुक रखते हैं, जो पीढ़ियों से इस जमीन पर काबिज हैं। बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या पुनर्वास की व्यवस्था किए इस तरह की दमनकारी कार्रवाई पूरी तरह से गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा कि वन विभाग और पुलिस के दोषी कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। पीड़ित महिलाओं के साथ मारपीट और अभद्रता का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कानूनी कार्यवाही की मांग की गई है। उन्होंने मांग की है कि बेघर हुए आदिवासियों को तत्काल रहने की व्यवस्था और उनके हुए नुकसान की उचित क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जाए।

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