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जंतर-मंतर हिंसा और ब्लास्ट के बाद हाईटेक हुई लाल किले की सुरक्षा

20 हजार जवान तैनात, हाईटेक सिस्टम से पैनी नजर

नई दिल्ली। 15 अगस्त से पहले राजधानी दिल्ली में लाल किला के आसपास सुरक्षा को और मजबूत कर दिया गया है। हालांकि, इस बार लाल किला की सुरक्षा पिछली बार से ज्यादा हाईटेक है। इसकी वजह यह है कि हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हिंसा हुई और कुछ असामाजिक तत्वों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए पुलिस कर्मियों पर भी हमला किया। वहीं, थोड़ा पीछे जाए तो बीते वर्ष 10 नवंबर को लाल किला के पास हुआ ब्लास्ट भी लोगों के जहन में आ जाएगा, जिसमें करीब 15 लोगों की जान गई थी। इन्हीं वजह से इस बार लाल किला के आसपास सुरक्षा ज्यादा मजबूत और नई तकनीक का इस्तेमाल कि जा रहा है।

लाल किला की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स, और दूसरी एजेंसियों के करीब 15,000 से 20,000 जवान तैनात किए जाएंगे। इनके अलावा क्विक रिस्पॉन्स टीम, स्नाइपर, हिट टीम और वॉचटावर के लोग भी खास जगहों पर तैनात रहेंगे। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जवानों की तैनाती के अलावा, सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम और चेहरे की पहचान तकनीक के जरिए आयोजन स्थल और उसके आसपास के इलाकों पर पैनी नजर रखी जाएगी।

लाल किले और उसके आसपास 1000 से जयादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही डेडिकेटेड कंट्रोल रूम 24 घंटे लाइव फीड की निगरानी करेंगे, वहीं, लाल किले के पांच पार्किंग क्षेत्रों में विस्फोटकों, हथियारों या प्रतिबंधित वस्तुओं की जांच के लिए वाहनों के नीचे की तरफ से जांच करने के लिए अंडर-व्हीकल सर्विलांस सिस्टम (यूवीएसएस) तैनात किए जाएंगे।

यह तकनीक खतरों या विसंगतियों का पता लगाने के लिए कैमरों और स्कैनर का उपयोग करती है, जिससे चौकियों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा मजबूत होती है। भीड़ की संख्या पर नजर रखने के लिए हेडकाउंट कैमरे और 200 से अधिक बॉडी वार्न कैमरे तैनात किए जाएंगे। एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा अभ्यासों, रात की गश्त और पैदल गश्त बढ़ाने के साथ-साथ, खासकर संवेदनशील इलाकों में जमीनी स्तर पर मौजूदगी बढ़ाने के लिए सादे कपड़ों वाले निगरानी दल भी तैनात किए जा रहे हैं।

साथ ही साइबर टीमें भी सोशल मीडिया पर नजर रख रही हैं ताकि शांति बिगाडऩे वाली किसी भी ऑनलाइन गतिविधि या अफवाह फैलाने वालों को पहचाना जा सके और समय रहते उन पर कार्रवाई की जा सके। वहीं, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 16 अगस्त तक दिल्ली के आसमान में पैराग्लाइडर, हैंग-ग्लाइडर, यूएवी, ड्रोन, हाट एयर बैलून और अन्य रिमोट से संचालित विमानों जैसे उप-पारंपरिक हवाई प्लेटफार्मों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है।

यह प्रतिबंध 2 अगस्त से लागू किया गया है। नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम से जुड़े अभिज्ञान ऐप की मदद से पुलिसकर्मी स्मार्टफोन और पोर्टेबल बायोमेट्रिक स्कैनर के जरिए किसी की पहचान तुरंत वेरीफाई कर सकेंगे। इससे अपराधियों, आरोपियों और कैदियों का क्रिमिनल रिकॉर्ड भी तुरंत मिल जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, यह प्लेटफॉर्म सिक्योर लॉगिन और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से पूरी तरह सुरक्षित है।

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