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वनडे क्रिकेट को 40 ओवर करने के प्रस्ताव को शुभमन गिल ने किया खारिज, जानें क्या कहा

भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल ने वनडे क्रिकेट को 40 ओवर का करने के प्रस्ताव का स्पष्ट विरोध किया है। उनका मानना है कि 50 ओवर का प्रारूप अपनी पहचान और प्रतिष्ठा बनाए रखे। साथ ही उन्होंने द्विपक्षीय (Bilateral) सीरीज की जगह त्रिकोणीय (Tri-Series) और चतुष्कोणीय (Quadrangular Series) टूर्नामेंट आयोजित करने की वकालत की, ताकि वनडे क्रिकेट को फिर से अधिक आकर्षक बनाया जा सके।

इंग्लैंड के खिलाफ मंगलवार से शुरू हो रही तीन मैचों की वनडे सीरीज से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गिल ने कहा कि मौजूदा समय में टी20 क्रिकेट और फ्रेंचाइजी लीगों के बढ़ते प्रभाव के कारण वनडे प्रारूप चुनौतियों का सामना कर रहा है। हाल ही में आईसीसी की वार्षिक बैठक में वनडे को 40 ओवर का करने पर भी चर्चा हुई थी, लेकिन गिल इससे सहमत नहीं हैं।
‘वनडे 40 ओवर का नहीं होना चाहिए’ :  शुभमन गिल ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि वनडे को 40 ओवर का किया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि यदि इस प्रारूप को और रोचक बनाना है तो पुराने दौर की तरह त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय सीरीज दोबारा शुरू की जानी चाहिए। गिल ने कहा, ‘पहले हम काफी त्रिकोणीय सीरीज खेलते थे।
ऑस्ट्रेलिया में भारत, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के बीच होने वाली सीरीज देखना और खेलना काफी मजेदार होता था। आप सिर्फ एक टीम के खिलाफ नहीं खेलते, बल्कि अलग-अलग टीमों और अलग-अलग मैदानों पर मुकाबले होते हैं। अगर वनडे को और दिलचस्प बनाना है तो द्विपक्षीय सीरीज की बजाय त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय सीरीज आयोजित की जानी चाहिए। इससे खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों का उत्साह बढ़ेगा।’

50 ओवर का विश्व कप ही सबसे प्रतिष्ठित :  गिल ने कहा कि उनका बचपन 50 ओवर के क्रिकेट को देखते हुए बीता है और उनके लिए सबसे बड़ा सपना इसी प्रारूप का विश्व कप जीतना है। उन्होंने कहा, ‘मैं बचपन से 50 ओवर का क्रिकेट देखता आया हूं। जब भी विश्व कप की बात होती है तो सबसे पहले 50 ओवर का विश्व कप ही दिमाग में आता है। मेरे लिए अगर कोई सबसे प्रतिष्ठित विश्व कप है तो वह 50 ओवर का विश्व कप ही है।’

2027 विश्व कप पर है टीम इंडिया की नजर :  भारतीय कप्तान ने कहा कि इंग्लैंड के खिलाफ यह वनडे सीरीज 2027 विश्व कप की तैयारियों के लिहाज से काफी अहम है। यह विश्व कप दक्षिण अफ्रीका में खेला जाएगा और इंग्लैंड की परिस्थितियां वहां से काफी हद तक मेल खाती हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारी तैयारी 2027 विश्व कप को ध्यान में रखकर चल रही है। हम यह देखना चाहते हैं कि दक्षिण अफ्रीका जैसी परिस्थितियों में कौन-सा संयोजन सबसे बेहतर रहेगा। इसलिए यह सीरीज हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है।’

कप्तानी का अनुभव भी होगा अहम
गिल ने कहा कि विश्व कप तक पहुंचने से पहले हर सीरीज उनके लिए कप्तान के तौर पर सीखने का मौका है। उन्होंने कहा, ‘अब से लेकर विश्व कप तक हर सीरीज मेरे लिए कप्तानी के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। जो भी अनुभव और सीख मुझे मिलेगी, वह विश्व कप में काफी काम आएगी।’

युवा खिलाड़ियों को मौके देना जरूरी :  भारतीय कप्तान का मानना है कि विश्व कप से पहले युवा खिलाड़ियों को पर्याप्त मौके मिलना बेहद जरूरी है ताकि वे बड़े मुकाबलों का दबाव झेलना सीख सकें। उन्होंने कहा, ‘नई प्रतिभाओं को मौका देना जरूरी है। जितना अधिक वे दबाव वाले मुकाबले खेलेंगे, उतना ही आत्मविश्वास बढ़ेगा और विश्व कप में टीम को फायदा मिलेगा। तीन मैचों की द्विपक्षीय सीरीज और 11 मैचों वाले विश्व कप में काफी अंतर होता है।’

चोटों से बदली टीम की योजनाएं :  गिल ने बताया कि नीतीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा की चोट के कारण टीम प्रबंधन को अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘हम चाहते थे कि इन खिलाड़ियों को विश्व कप से पहले ज्यादा से ज्यादा मैच खिलाए जाएं ताकि वे पूरी तरह तैयार हो सकें। लेकिन चोटों के कारण हमें संयोजन बदलना पड़ा। फिर भी ऐसा नहीं है कि हमारी टीम अस्थिर है।’

बड़े मैचों का अनुभव देगा फायदा :  गिल ने उम्मीद जताई कि इंग्लैंड और आगामी न्यूजीलैंड सीरीज में खिलाड़ियों को बड़े मुकाबलों का अनुभव मिलेगा, जिससे वे दबाव की परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार होंगे। उन्होंने कहा, ‘अगर खिलाड़ियों को इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ खेलने का मौका मिलेगा तो वे दबाव में बेहतर प्रदर्शन करना सीखेंगे, जिसका फायदा विश्व कप में मिलेगा।’

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