अयोध्या । अयोध्या की मणिरामदास छावनी में हो रही श्रीराम ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट में नए पदाधिकारियों की घोषणा की गई है। ट्रस्ट में तीन नए सदस्य शामिल किए गए हैं। नए शामिल होने वाले सदस्यों में मदन मोहन पांडेय अयोध्या के, महेश भागचंदका दिल्ली के और निर्मला यादव अयोध्या से हैं। बैठक में अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि, ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती समेत अन्य ट्रस्टी पहुंचे हैं। बैठक को लेकर अयोध्या में पहले से ही हलचल बनी हुई थी।
1. महंत नृत्य गोपाल दास
2. कमलनयनदास
3. स्वामी गोविंद देव गिरी
4. कृष्ण मोहन
5. दिनेंद्रदास जी महाराज
6. दिनेशचंद्र जी
7. बजरंग बांगाड़ा
8. जगदीश आफले
9. राज गोपाल मिनियार
10. समीर पांडा
राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य और स्थाई सदस्य
के. परासरन : सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य।
महंत नृत्य गोपाल दास : अध्यक्ष, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट।
स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज : कोषाध्यक्ष।
कृष्ण मोहन : अंतरिम महासचिव।
जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज : सदस्य (प्रयागराज)।
जगतगुरु मध्वाचार्य स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ जी महाराज : सदस्य (पेजावर मठ, उडुपी)।
युगपुरुष परमानन्द जी महाराज : सदस्य (हरिद्वार)।
महंत दिनेंद्र दास : सदस्य (निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि)।
निर्मला यादव : नई महिला ट्रस्टी (शिकोहाबाद)।
मदन मोहन पांडे : नए ट्रस्टी (अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता)।
महेश भागचंदका : नए ट्रस्टी (दिल्ली)।
पदेन और सरकारी सदस्य
नृपेंद्र मिश्रा : अध्यक्ष, मंदिर निर्माण समिति।
प्रशांत लोखंडे : केंद्र सरकार के प्रतिनिधि।
संजय प्रसाद : उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि।
शशांक त्रिपाठी : जिलाधिकारी अयोध्या।
राजेश पांडेय पर क्यों टिकी हैं निगाहें?
अंतिम फैसला भले ही ट्रस्ट को करना है, लेकिन CEO पद की चर्चाओं में राजेश पांडेय लगातार सबसे आगे बताए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे पांडेय को पुलिस सेवा के दौरान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करने वाले अधिकारी के तौर पर पहचान मिली। राम मंदिर के सीईओ की जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं होगी। अयोध्या में प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय, वीआईपी और आम श्रद्धालुओं की व्यवस्थाएं तथा मंदिर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स के प्रबंधन जैसी कई जिम्मेदारियां सीईओ के सामने होंगी। यही वजह है कि सुरक्षा और प्रशासनिक तंत्र की जटिलताओं को करीब से समझने वाले राजेश पांडेय की दावेदारी को खास वजन मिल रहा है।







