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नाबालिग पत्नी से संबंध बनाने पर लगेगा पोक्सो एक्ट, धार्मिक मान्यताएं नहीं दे सकती सुरक्षा

कोच्चि। केरल हाईकोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाले मामले में स्पष्ट कर दिया है कि कानून और बच्चों की सुरक्षा से ऊपर कोई भी धार्मिक मान्यता या निजी प्रथा नहीं हो सकती।

कोर्ट ने उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें एक व्यक्ति ने 17 वर्षीय नाबालिग के साथ बार-बार दुष्कर्म के मामले में आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने की गुहार लगाई थी। आरोपित का तर्क था कि उन्होंने मुस्लिम रीति-रिवाजों के तहत निकाह किया था, इसलिए वह कानून की नजर में सुरक्षित है, लेकिन जस्टिस जोबिन सेबास्टियन ने मानवीय संवेदनाओं और न्याय के तकाजे को सर्वाेपरि रखते हुए एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है।

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि अक्टूबर 2021 की है, जब आरोपित कथित तौर पर एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया और चार दिनों तक लगातार उसका यौन शोषण किया। विडंबना यह रही कि इस घिनौने कृत्य में अन्य लोगों ने भी सहयोग किया और पीड़ित लड़की के माता-पिता ने भी सब कुछ जानते हुए चुप्पी साधे रखी।

आरोपित के वकील ने भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद-2 का हवाला देते हुए यह दलील दी कि 15 से 18 वर्ष की आयु के बीच की अपनी ‘कानूनी पत्नी’ के साथ शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।

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