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छत्तीसगढ़

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से माउंट एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचीं अमिता श्रीवास

छत्तीसगढ़ की बेटी ने रचा इतिहास

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की रहने वाली अमिता श्रीवास ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848.86 मीटर) पर तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया है। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने वाली अमिता की सफलता उनके संघर्ष, मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति की मिसाल बन गई है।

अमिता श्रीवास का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए अपने सपने को जिंदा रखा और लगातार तैयारी व मेहनत के दम पर पर्वतारोहण के क्षेत्र में कदम बढ़ाया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।

माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक पहुंचकर अमिता ने यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

उनकी इस उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ में खुशी का माहौल है। अमिता की कहानी अब प्रदेश की उन बेटियों के लिए प्रेरणा बन रही है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखती हैं। अमिता श्रीवास की सफलता सिर्फ एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष से शिखर तक पहुंचने की प्रेरणादायक कहानी है।

संघर्ष और उपलब्धि 

अमिता एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं और पेशे से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता (महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत) हैं।

उन्होंने बिना किसी अवकाश के लगातार 8 वर्षों तक पर्वतारोहण की कठिन ट्रेनिंग और एक्सरसाइज की।एवरेस्ट से पहले उन्होंने लद्दाख की 6070 मीटर ऊंची यूटी कांगरी चोटी और अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो (5895 मीटर) को भी सफलतापूर्वक फतह किया था।

एवरेस्ट फतह करने के बाद उतरते वक्त अत्यधिक ठंड और ऑक्सीजन की कमी के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उनका नेपाल के काठमांडू में इलाज भी चला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी और उनके साहस को सलाम किया।

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