इंदौर। मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप मामले में छह साल पहले कई अफसरों, नेताओं और रसूखदार लोगों को निशाना बनाने वाले गिरोह की कथित सरगना श्वेता जैन एक बार फिर सुर्खियों में है। पुलिस के अनुसार, जेल से बाहर आने के बाद श्वेता ने कथित तौर पर नया गिरोह तैयार किया और हनीट्रैप पार्ट-2 की साजिश रची। इस बार उसके निशाने पर बिल्डर, ठेकेदार और अन्य रसूखदार लोग बताए जा रहे हैं।
शराब ठेकेदार को फंसाने का आरोप, एक करोड़ की मांग : पुलिस के अनुसार, इंदौर के शराब ठेकेदार पिंटू ठाकुर को गिरोह की सदस्य रेशू ने अपने जाल में फंसाया। कथित तौर पर स्पाई कैमरे से उसके वीडियो बनाए गए और बाद में इन्हीं वीडियो के आधार पर ब्लैकमेलिंग की योजना बनाई गई।
जांच में सामने आया कि सौदेबाजी के लिए श्वेता ने अलका दीक्षित को भी गिरोह से जोड़ा था, जो शराब के कारोबार से जुड़ी बताई जाती है। आरोप है कि 28 अप्रैल की रात पिंटू ठाकुर को साथियों के साथ रोका गया और उनसे एक करोड़ रुपये की मांग की गई।
पिंटू ठाकुर के इंदौर के एयरपोर्ट क्षेत्र में शराब के ठेके हैं। वह अलका दीक्षित को पहले से जानता था। आरोप है कि उन्हें पैसे देने या प्रॉपर्टी में साझेदारी देने का विकल्प दिया गया। ऐसा नहीं करने पर कथित वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई।
सागर की रेशू को बनाया हनीट्रैप गर्ल : पुलिस जांच के अनुसार, श्वेता जैन ने सागर की रहने वाली रेशू को गिरोह में शामिल किया था। आरोप है कि उसे नेताओं और रसूखदार लोगों से नजदीकी बढ़ाने की सलाह दी गई थी। इसके जरिए इंदौर, उज्जैन समेत अन्य बड़े शहरों के ठेकेदारों और प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाने की योजना थी।
हालांकि, शराब ठेकेदार की शिकायत के बाद इंदौर पुलिस सक्रिय हो गई। पुलिस ने सागर स्थित श्वेता के घर पर छापा मारकर 9 मोबाइल फोन, कैमरे, मेमोरी कार्ड, पेन कैमरे और बटन कैमरे समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। पुलिस के अनुसार, इन उपकरणों का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों के वीडियो बनाने के लिए किया जाता था।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में अन्य कितने लोग शामिल थे और किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया।
छह साल पहले भी आया था श्वेता का नाम : छह साल पहले सामने आए चर्चित हनीट्रैप मामले में भी श्वेता जैन का नाम प्रमुख रूप से सामने आया था। पुलिस जांच में आरोप लगा था कि श्वेता ने अपने संपर्क में आई आरती दयाल को गिरोह में शामिल किया और उसके जरिए इंदौर नगर निगम के तत्कालीन अधीक्षण यंत्री हरभजन सिंह को हनीट्रैप में फंसाया गया।
बताया गया कि हरभजन सिंह ने आरती के लिए इंदौर के एक होटल में कमरा बुक कराया था। आरोप है कि वहां उनका वीडियो बनाया गया और बाद में पैसों की मांग शुरू कर दी गई। इसके बाद हरभजन सिंह ने पुलिस से शिकायत की थी। उस समय पुलिस ने इंदौर और भोपाल से हनीट्रैप गिरोह से जुड़ी चार महिलाओं को गिरफ्तार किया था। यह मामला पूरे प्रदेश में काफी चर्चित रहा था। बाद में डेढ़ साल पहले हरभजन सिंह रीवा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे।
अब आगे क्या होगा? : पुलिस ने इस मामले में करीब 600 पेज का पूरक चालान कोर्ट में पेश किया है। अब गवाहों और सबूतों के आधार पर आरोपों को साबित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पुलिस गिरोह के कथित मददगारों की भी तलाश कर रही है। जांच में यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उन्हें भी आरोपी बनाया जा सकता है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह के संपर्क में कौन-कौन है।







