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झारखंड

JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते गिरफ्तार

रांची।  झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को सीआईडी ने गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच हुई है।

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को कथित परीक्षा अनियमितता के मामले में CID ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) में कथित गड़बड़ियों की जांच के बीच हुई है। JPSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कुछ समय से सवाल उठते रहे हैं। मामले की जांच सीआईडी कर रही है और इसी क्रम में जांच एजेंसी की टीम ने JPSC मुख्यालय में छापेमारी भी की थी।

राज्य के मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद पिछले साल फरवरी में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के चेयरमैन नियुक्त किए गए खियांग्ते ने 22 जुलाई को इस्तीफ़ा दे दिया था। अतिरिक्त महानिदेशक (CID) मनोज कौशिक ने  बताया कि हमने भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के सिलसिले में JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को गिरफ़्तार किया है। 28 जुलाई से खियांग्ते से चार बार पूछताछ की जा चुकी थी। यह गिरफ़्तारी JPSC के तीनों सदस्यों के इस्तीफ़े के एक दिन बाद हुई है। एजेंसी द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर उम्मीदवारों के भारी विरोध के बीच उन्होंने इस्तीफ़ा दिया था।
खियांग्ते की गिरफ़्तारी के साथ ही इस मामले में CID द्वारा गिरफ़्तार किए गए लोगों की संख्या 20 हो गई है। कथित गड़बड़ी के सिलसिले में CID द्वारा उनके सरकारी आवास समेत कई जगहों पर तलाशी लेने से एक दिन पहले ही उन्होंने JPSC चेयरमैन पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। हालांकि, खियांग्ते ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्तीफ़ा दिया है।

मामले की जांच झारखंड सीआईडी को सौंपी गई है। जांच के क्रम में एजेंसी ने जेपीएससी कार्यालय में भी कार्रवाई की है। अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ के साथ-साथ संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है।

सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में कथित अनियमितताएं कैसे हुईं और इसमें किन लोगों की भूमिका थी। वहीं, छात्र लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

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