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छत्तीसगढ़

मस्तूरी गोलीकांड में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला : कांग्रेस नेता नागेंद्र राय को अग्रिम जमानत से इनकार

बिलासपुर। उच्च न्यायालय ने बिलासपुर के बहुचर्चित मस्तूरी गोलीकांड और दो लाख रुपये की सुपारी किलिंग मामले के आरोपी कांग्रेस नेता नागेंद्र राय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकल पीठ ने आरोपों की गंभीरता, दस महीने से आरोपी की फरारी और आपराधिक इतिहास को देखते हुए यह फैसला सुनाया। राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि आरोपी ने वारदात के लिए हथियार मुहैया कराए थे और वह दस महीनों से फरार रहकर जांच में सहयोग नहीं कर रहा है।

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नागेंद्र राय ने सह-आरोपियों को वारदात को अंजाम देने के लिए हथियार उपलब्ध कराए थे। कॉल विवरण से भी आरोपी के लगातार सह-आरोपी तारकेश्वर पाटले के संपर्क में रहने की पुष्टि हुई है। नागेंद्र राय पर आठ अन्य गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। आरोपी ने अन्य लोगों के माध्यम से विश्वजीत अनंत के साथ बैठक की थी और हत्या की सुपारी दी थी। इन गंभीर आरोपों और दस महीने की फरारी को देखते हुए राज्य ने अग्रिम जमानत का विरोध किया।
दूसरी तरफ, नागेंद्र राय के वकील ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को राजनीतिक रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष का तर्क था कि हथियार देने या सह-आरोपी विश्वजीत के साथ किसी भी तरह की डील करने का कोई सीधा प्रमाण नहीं है। पूर्व में दर्ज आठ मामलों में से चार में आरोपी बरी हो चुका है और एक मामले में आरोप पत्र दाखिल नहीं हुआ है। उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद टिप्पणी की कि आरोपी पर हथियार आपूर्ति करने जैसा बेहद गंभीर आरोप है, वह लंबे समय से फरार है और उसने जांच में कोई सहयोग नहीं किया है।
मस्तूरी गोलीकांड और सुपारी किलिंग की साजिश
मस्तूरी में 28 अक्टूबर की शाम करीब 6 बजे तमेश सिंह के दफ्तर के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी की गई थी। इस जानलेवा हमले में धनेंद्र सिंह उर्फ राजू सिंह और चंद्रकांत सिंह को गोलियां लगी थीं। पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि नितेश सिंह, चंद्रकांत सिंह, राजू सिंह, तमेश सिंह और अन्य लोगों की हत्या करने के उद्देश्य से दो लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। इस पूरी आपराधिक साजिश में कांग्रेस नेता नागेंद्र राय की मुख्य भूमिका पाई गई।

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