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महाराष्ट्र में 17 महीने तक बेकार पड़ा रहा 82.78 करोड़ का हेलीकॉप्टर

मुंबई। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने नक्सल विरोधी आपरेशन के लिए खरीदे गए 82.78 करोड़ रुपये के हेलीकॉप्टर की खातिर रखरखाव एजेंसी की नियुक्ति में देरी पर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की है।

कैग का कहना है कि इससे हेलीकाप्टर 17 महीने तक बेकार पड़ा रहा और 2.07 करोड़ रुपये का अनावश्यक खर्च हुआ। 10 जुलाई को राज्य विधानसभा में पेश ऑडिट रिपोर्ट में कैग ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार के विमानन निदेशालय ने हेलीकॉप्टर की डिलीवरी के बाद रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) एजेंसी की सेवा लेने में लगभग 10 महीने लगा दिए। एमआरओ एजेंसी को फाइनल करने में लगभग 10 महीने की देरी की वजह से हेलीकॉप्टर को दैनिक जांच और इंजन ग्राउंड रन नहीं मिल सका, जो उसकी उड़ान क्षमता बनाए रखने के लिए जरूरी था।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र सरकार ने गढ़चिरौली और आस-पास के इलाकों में नक्सल विरोधी अभियानों को सुविधाजनक बनाने के लिए मई 2018 में हेलीकॉप्टर खरीदने की मंजूरी दी थी। महाराष्ट्र सरकार के विमानन निदेशालय ने जुलाई 2019 में जर्मनी की मेसर्स एयरबस हेलीकॉप्टर से 82.78 करोड़ रुपये में हेलीकॉप्टर खरीदा। इसे 18 सितंबर, 2019 को डिलीवर किया गया और एक सप्ताह बाद इसका परीक्षण उड़ान हुआ।

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