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छत्तीसगढ़

पीएससी स्कैम में सीबीआई का बड़ा एक्शन! पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक सहित 5 गिरफ्तार

रिमांड पर लेने की तैयारी, पेपर लीक, मार्क्स में हेराफेरी और घूसखोरी के आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ में चर्चित पीएससी भर्ती घोटाले की जांच में जुटी सीबीआई ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, रिटायर्ड आईएएस और पूर्व सचिव जीवनलाल ध्रुव, उनके बेटे और चयनित अफसर सुमित ध्रुव, तथा निशा कोसले और दीपा आदिल को गिरफ्तार कर लिया है। इन सभी को शुक्रवार दोपहर रायपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां जांच एजेंसी ने रिमांड की मांग की।

गिरफ्तारी के प्रमुख बिंदु

आरती वासनिक पूर्व परीक्षा नियंत्रक, पहले भी हो चुकी हैं पूछताछ में शामिल। जीवनलाल ध्रुव पीएससी के पूर्व सचिव, रिटायर्ड आईएएस सुमित ध्रुवः जीवनलाल का बेटा, पीएससी से चयनित अफसर। निशा कोसले और दीपा आदिल पीएससी चयन प्रक्रिया से जुड़ीं थीं।
सीबीआई इन सभी से घोटाले में भूमिका, सिफारिशें, पेपर लीक, मार्क्स में हेराफेरी, और घूसखोरी के आरोपों को लेकर गहन पूछताछ करना चाहती है।

अब तक की सीबीआई जांच में क्या हुआ?

18 नवंबर 2024ः पीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और उद्योगपति श्रवण गोयल गिरफ्तार। 10 जनवरी 2025ः 5 और नामज़द आरोपी (नितेश सोनवानी, ललित गणवीर, शशांक गोयल, भूमिका कटियार और साहिल सोनवानी) गिरफ्तार किए गए। ये सभी डिप्टी कलेक्टर पदों पर चयनित हुए थे और फिलहाल जेल में हैं।

आरोप क्या हैं?

सीबीआई जांच के मुताबिक, परीक्षा नियंत्रक और सचिव स्तर पर मिलीभगत से मेरिट लिस्ट में हेरफेर हुआ। धनबल और सिफारिशों के जरिए अयोग्य उम्मीदवारों को चयनित कराया गया। उत्तर पुस्तिकाओं में बदलाव, ओएमआर शीट से छेड़छाड़, और इंटरव्यू में फर्जीवाड़ा भी आरोपों में शामिल हैं।

क्या बोले सीबीआई

सीबीआई सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच में यह साफ हो गया है कि पीएससी की चयन प्रक्रिया के हर स्तर पर भारी अनियमितताएं हुई हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों के पास से कई दस्तावेज, चैट रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स भी जब्त की गई हैं।

आगे क्या?

रिमांड मंजूर होते ही ब्ठप् इनसे आमने-सामने पूछताछ करेगी। अगले चरण में राजनीतिक संरक्षण और घोटाले से जुड़े आर्थिक लेन-देन की जांच भी तेज की जाएगी। पीएससी की पिछली परीक्षाओं को रद्द करने या पुनर्मूल्यांकन की मांग भी तेज हो सकती है।

यह घोटाला राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में सीबीआई की कार्रवाई और भी बड़ी नामों तक पहुंच सकती है।

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