एक साल बाद भी नहीं हो सका पुनर्निर्माण
कोरबा। बीते वर्ष हुई भारी बारिश में ग्राम पंचायत रजगामार से केरवा को जोड़ने वाली सड़क और पुल बह जाने के बाद भी अब तक उसका पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। एक वर्ष बीतने के बावजूद पुल क्षतिग्रस्त स्थिति में पड़ा है, जिससे आसपास के लगभग 10 ग्रामों के ग्रामीणों और किसानों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह मार्ग कोरकोमा धान खरीदी केंद्र जाने वाले किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता था।
पुल टूटने के कारण अब किसानों को ट्रैक्टर और अन्य वाहनों से खाद, बीज और कृषि सामग्री ले जाने के लिए 5 से 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे समय और डीजल दोनों की खपत बढ़ गई है। बारिश के दौरान पुल के साथ सड़क का हिस्सा भी कट गया था। ग्रामीणों ने आवागमन बनाए रखने के लिए लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार किया, लेकिन वह केवल दोपहिया और पैदल चलने वालों के लिए ही किसी तरह उपयोगी है। चारपहिया वाहन और ट्रैक्टर इस मार्ग से नहीं गुजर पा रहे हैं। लगातार बारिश के कारण अस्थायी पुल भी कमजोर हो गया है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
रजगामार, केराकछार, पुरानी बस्ती, टेवानारा, पतरापालि, मौहार सहित आसपास के गांवों के लोग इसी मार्ग से कोरकोमा, केरवा, भैंसमा, रामपुर और करतला की ओर आवागमन करते थे। पुल टूटने से ग्रामीणों की दैनिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। किसानों का कहना है कि धान की फसल के लिए यह समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। खाद, बीज और कृषि उपकरण खेत तक पहुंचाने में अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। वहीं आगामी धान खरीदी सीजन में भी यही स्थिति रही तो किसानों को फसल मंडी तक पहुंचाने में भारी दिक्कत होगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बारिश समाप्त होने का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए। उनका कहना है कि यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि कई ग्रामो की जीवनरेखा है।







