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अपरा एकादशी कल : भगवान विष्णु को प्रसन्न करने इन मंत्रों का करें जाप, बनी रहेगी सुख-समृद्धि

Ekadashi Vishnu ji Puja Mantra: हर साल ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह एकादशी अत्यंत ही फलदायी और पुण्य देने वाली मानी जाती है। एकादशी का व्रत रखने से न केवल आर्थिक तंगी दूर होती है, बल्कि समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होती है।

अपरा एकादशी का व्रत इस बार 13 अप्रैल को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। विष्णु पुराण के अनुसार, अपरा एकादशी के दिन दान पुण्य करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने और विशेष मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति के सभी पाप मिट जाते हैं। अपरा एकादशी का व्रत करने से लक्ष्मी नारायण की कृपा से जातक के घर-परिवार में सदैव सुख-समृद्धि का वास रहता है। तो आइए जानते हैं कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए किन मंत्रों का जाप करना चाहिए।

अपरा एकादशी पूजा मुहूर्त 2026 : 13 मई 2026 को पूजा और व्रत के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 8 मिनट से 4 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। वहीं प्रातः संध्या का समय सुबह 4 बजकर 29 मिनट से 5 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त 7 बजकर 2 मिनट से 7 बजकर 23 मिनट तक रहेगा और सायाह्न संध्या 7 बजकर 4 मिनट से 8 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा अमृत काल शाम 7 बजकर 41 मिनट से रात 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा, जिसे पूजा के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है।

विष्णु जी का मूल मंत्र :  एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित रहता है। ऐसे में विष्णु के इस मूल मंत्र का जाप करने से जातक की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण हो जाती हैं। अगर आपकी कोई ऐसी इच्छा है जो लंबे समय से अधूरी है तो अपरा एकादशी के दिन पूजा के दौरान भगवान विष्णु के इस मूल मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।  विष्णु जी का मूल मंत्र है- ‘ॐ नमोः नारायणाय॥’

एकादशी के दिन विष्णु जी के इन मंत्रों का भी जरूर करें जाप

  1. ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
  2. ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
  3. मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
  4. शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम् विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

 

डिस्क्लेमरउक्त लेख धार्मिक आस्था लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए  Today Studio उत्तरदायी नहीं है।

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