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धनतेरस के दिन क्यों ख़रीदे जाते हैं बर्तन… समुद्र-मंथन से जुड़ा हैं इसके पीछे का रहस्य

दीपावली के दो दिन पहले धनतेरस का पर्व होता हैं, जिसे लोग बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। धनतेरस के दिन बर्तन खरीदने की परम्परा हैं। लोगों का मानना हैं कि इस दिन बर्तन खरीदनें से उसमें दोगुना तिगुणा वृद्धि होती है। आखिर क्यों लोग इस दिन ही बर्तन खरीदने को शुभ मानते हैं, क्या हैं इसके पीछे का कारण। आइये हम आपको बताते हैं कि इस परम्परा की शुरुआत कैसे हुई।

शास्त्रों के अनुसार, जब समुद्र-मंथन हुआ तब 14 अनमोल रत्न प्राप्त हुए थे। जिसमें सबसे अनमोल रत्न धन्वन्तरि हैं। जब वह समुद्र-मंथन के समय प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था, जिसके लिए देवता और असुर समुद्र-मंथन कर रहे थे। धन्वन्तरि चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए ही धनतेरस के दिन बर्तन खरीदने की परम्परा मानी जाती है। ऐसा कहा जाता हैं कि इस दिन बर्तन खरीदनें से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है। घर-परिवार में सुख- समृद्धि बनी रहती हैं।

इन जगहों पर अवश्य जलाये दीये..

धनतेरस के दिन 13 दीये जलाने चाहिए। दीयों को घर में अलग-अलग जगहों पर रखे। जैसे प्रवेश द्वार पर, रसोई और पूजा कक्ष, इससे आपके घर में धन-वैभव हमेशा बढ़ेगा। क्योंकि हर दीये का अपना एक विशिष्ट अर्थ होता हैं।

धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने का रिवाज

धनतेरस के दिन झा़ड़ू खरीदना बहुत ही शुभ होता है। कहा जाता है कि झा़ड़ू खरीदने से वर्षभर के लिए घर से नकारात्मक उर्जा बाहर निकल जाती है। इस दिन झा़ड़ू खरीदना शुभ माना गया है। क्योंकि घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है। इस दिन हाथ से बनाई गई सींक वाली झा़ड़ू खरीदना चाहिए। झा़ड़ू खरीदने के बाद उस पर सफेद धागा बांधा जाता है। जिससे मां लक्ष्मी घर में विराजमान रहे। इस दिन विषम संख्या में झाड़ू खरीदना चाहिए। जैसे 3, 5, या 7 झाड़ू खरीदना चाहिए।

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