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भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्टों से बचें, राज्य में न फैलने दें मणिपुर हिंसा का असर

नागालैंड पुलिस की अपील

कोहिमा। पड़ोसी राज्य मणिपुर में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और वहां भड़क़ी जातीय हिंसा की चिंगारी नागालैंड तक पहुंचने की आशंका गहराने लगी है। इस नाजुक मोड़ पर नागालैंड पुलिस ने राज्य के नागरिकों से शांति, सांप्रदायिक सौहार्द और अत्यधिक सतर्कता बरतने की पुरजोर अपील की है।

नागालैंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रूपिन शर्मा ने जनता से बेहद जिम्मेदारी से व्यवहार करने का आग्रह किया है। उन्होंने साफ कहा कि लोग किसी भी असत्यापित जानकारी, अफवाहों या भडक़ाऊ सोशल मीडिया सामग्री को आगे शेयर या फॉरवर्ड न करें। ऐसी हरकतें समाज में भय, गलतफहमी और सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकती हैं। जारी आधिकारिक अपील में पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए झूठे और भ्रामक आख्यानों के प्रसार को लेकर गंभीर चेतावनी दी।

पुलिस का कहना है कि आज के एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाले दौर में फर्जी खबरें बनाना और उन्हें फैलाना पहले से कहीं ज्यादा आसान और खतरनाक हो चुका है। यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब मणिपुर के कांगपोकपी जिले में सशस्त्र गुटों की ओर से बंधक बनाए गए लोगों को छुड़ाने के लिए व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। ज्ञात हो कि कांगपोकपी और सेनापति जिलों में सशस्त्र समूहों की ओर से बंधक बनाए गए कुकी और नागा समुदायों के लगभग 38 लोगों में से 31 को 14 और 15 मई को रिहा कर दिया गया था।

इन लोगों को उस समय अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया था, जब 13 मई को कांगपोकपी में संदिग्ध उग्रवादियों ने तीन चर्च नेताओं की गोली मारकर हत्या कर दी थी और चार अन्य को घायल कर दिया था। इसके अलावा नोनी जिले में भी एक नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और उसकी पत्नी घायल हुई थी।

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