घटना स्थल पर हुई मौत
कोरबा। छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला आकांक्षी और डीएमएफ फंड से समृद्ध होने का दावा तो करता है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बेहद डरावनी है। इसी कड़ी मन जानकारी के अनुसार कोरबा जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव एक बार फिर एक ग्रामीण की मौत का कारण बन गया। लेमरू थाना क्षेत्र में सड़क हादसे का शिकार हुआ एक गंभीर रूप से घायल ग्रामीण लगभग 3 घंटे तक तड़पता रहा, लेकिन उसे न तो समय पर 108 आपातकालीन एम्बुलेंस मिली और न ही डायल 112 की मदद मिल पाई। अंततः इलाज के अभाव में उसने घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिया।
सिर पर आई थी गंभीर चोट, बाइक पर ले जाना नहीं था मुमकिन
जानकारी के अनुसार ग्राम अखराडाड निवासी ग्रामीण लामपहाड़ मार्ग से बाइक पर गुजर रहा था, तभी वह सड़क हादसे का शिकार हो गया। सिर पर गंभीर चोट आने के कारण वह घटना स्थल पर ही बेहोश हो गया। आधे घंटे बाद जब स्थानीय ग्रामीणों को इसकी भनक लगी, तो वे तुरंत मदद के लिए दौड़े। ग्रामीण की हालत इतनी नाजुक थी कि उसे बाइक पर बैठाकर चिकित्सालय ले जाना असंभव था, उसे तत्काल इमरजेंसी लाइफ सपोर्ट (एम्बुलेंस) की जरूरत थी।
एम्बुलेंस का वाहन चालक जा चुका था घर, 3 घंटे बाद पहुंची 112
ग्रामीणों ने जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू के प्रभारी से संपर्क किया, तो बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब मिला कि “108 एम्बुलेंस का वाहन चालक अपने घर जा चुका है।” इसके बाद ग्रामीणों ने आपातकालीन सेवा डायल 112 को फोन घुमाया, लेकिन डायल 112 की टीम को मौके पर पहुंचने में पूरे 3 घंटे लग गए। जब तक मदद पहुंची, तब तक घायल ग्रामीण के प्राण पखेरू उड़ चुके थे।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि लेमरू क्षेत्र में 108 एम्बुलेंस की सेवा केवल दिन के भरोसे चल रही है। रात के लिए यहाँ न तो पर्याप्त वाहन चालक हैं और न ही इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन। दिन में ड्यूटी करने वाले कर्मचारी के घर जाने के बाद पूरा वनांचल भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस क्षेत्र में 24 घंटे शिफ्ट के अनुसार वाहन चालकों की तैनाती की जाए, ताकि किसी और को अपनी जान न गंवानी पड़े।







