डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध रोकने के ऐलान पर ईरान का पहला रिएक्शन सामने आया है। ईरान की सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा, दुश्मन को हमने हरा दिया। वह एक बार फिर भागने पर मजबूर हो गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जैसे ही ईरान जंग को कुछ दिनों के लिए रोकने का ऐलान किया, ईरान ने इसे अपनी बड़ी जीत बताते हुए अमेरिका का जमकर मजाक उड़ाया। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने अमेरिका को चिढ़ाते हुए कहा, लड़ाई अभी जारी है… और यह शैतान की एक और बड़ी हार है। डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका को हमने एक बार फिर हरा दिया है। ईरान का यह तीखा तंज ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया इस महायुद्ध के रुकने की उम्मीद कर रही थी, लेकिन तेहरान के इन तल्ख तेवरों ने स्पष्ट कर दिया है कि वह कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिका को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता।
दरअसल, यह पूरा ताजा विवाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जो उन्होंने कुछ ही समय पहले दिया था। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू होने के बाद से ट्रंप का यह अब तक का सबसे नरम और सुलह वाला संदेश माना जा रहा था। अपने बयान में ट्रंप ने ईरान के साथ हुई “बहुत अच्छी और उत्पादक” (वेरी गुड एंड प्रोडक्टिव) बातचीत का विशेष रूप से जिक्र किया था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के इस शांति और कूटनीतिक सफलता के दावे की हवा खुद ईरान ने निकाल दी है। ईरान की तरफ से ऐसी किसी भी सकारात्मक बातचीत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ट्रंप का यह नरम बयान उन आक्रामक और युद्धोन्मादी धमकियों के बिल्कुल विपरीत है, जो दोनों देशों ने इसी सप्ताहांत एक-दूसरे को खुलेआम दी थीं। ईरान के इस ताने ने वाशिंगटन के दावों और रणनीति पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वहीं ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी ‘फार्स न्यूज़ एजेंसी’ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बातचीत वाले दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। एजेंसी ने एक अज्ञात ईरानी सूत्र के हवाले से स्पष्ट किया है कि तेहरान और ट्रंप के बीच प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी संपर्क नहीं हुआ है । सूत्र ने अमेरिका पर सीधा तंज कसते हुए दावा किया कि ट्रंप ने सुलह और बातचीत का यह राग इसलिए अलापा क्योंकि वे बुरी तरह डर गए थे। ईरान की ओर से जब यह सख्त चेतावनी दी गई कि जवाबी कार्रवाई में पूरे पश्चिम एशिया के सभी बिजली संयंत्र (पावर स्टेशन) उसके निशाने पर होंगे, तो इस खौफनाक और विनाशकारी धमकी को सुनकर अमेरिकी राष्ट्रपति को अपने कदम पीछे खींचने पड़े।







