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ईरान-इजरायल तनावः एशिया की दिग्गज अर्थव्यवस्थाओं पर मंडराया आर्थिक संकट, रिपोर्ट में बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली/सिंगापुर। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने अब पूरी दुनिया, खासकर एशिया की रफ़्तार पर ब्रेक लगाने के संकेत दे दिए हैं। मूडीज एनालिटिक्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे अमीर देशों के साथ-साथ भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाओं को भी गंभीर चोट पहुंच सकती है।

हॉर्मुज बना गले की हड्डी

इस पूरे संकट का केंद्र स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज है। वैश्विक तेल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा और करीब 20 प्रतिशत (तरल प्राकृतिक गैस) की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से होती है। विशेषज्ञों को डर है कि युद्ध की स्थिति में अगर यह रास्ता बाधित हुआ, तो ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती है।

किन देशों पर होगा सबसे ज्यादा असर?

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि वे देश जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं, वे सबसे पहले ‘जद’ में आएंगेः

अमीर अर्थव्यवस्थाएंः जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और सिंगापुर अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा तेल और गैस बाहर से मंगाते हैं। कीमतों में जरा सा भी उछाल यहां महंगाई को आसमान पर पहुंचा सकता है।
भारत की स्थितिः भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर अत्यधिक निर्भर है। कच्चा तेल महंगा होने से भारत का व्यापार घाटा बढ़ेगा और रुपया कमजोर हो सकता है।
चीन को मामूली राहतः चीन के पास तेल का बड़ा भंडार है और वह ईरान से रियायती दरों पर तेल ले रहा है, जिससे उसे थोड़ी सुरक्षा मिल सकती है।

महंगाई और ब्याज दरों का चक्रव्यूह

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन और खाद की लागत पर पड़ता है, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल होगा, जिससे आम आदमी के लिए लोन और म्डप् महंगे बने रह सकते हैं।

उभरते देशों के लिए ‘अलार्म बेल’

रूस-यूक्रेन युद्ध ने पहले ही श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों की कमर तोड़ दी थी। अब खाड़ी देशों में अस्थिरता इन देशों के लिए दोबारा “दोहरी मार” साबित हो सकती है, जिससे सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता का खतरा भी बढ़ सकता है।

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