पीएम मोदी सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर रूस की राजधानी मॉस्को पहुंचे। मॉस्को पहुंचने पर पीएम मोदी का जोरदार स्वागत किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 से 9 जुलाई तक रूस की आधिकारिक यात्रा पर हैं। रूस के प्रथम उपप्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव ने वनुकोवो-2 हवाई अड्डे पर पीएम की अगवानी की। वह प्रधानमंत्री मोदी को हवाई अड्डे से उनके होटल तक छोड़ने उनके साथ गए।
अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यापार, ऊर्जा एवं रक्षा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान देते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शिखर वार्ता करेंगे। मोदी ने मॉस्को पहुंचने के बाद एक बयान में कहा कि वह भविष्य के क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को गहन बनाने को लेकर आशान्वित हैं। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत और रूस के बीच मजबूत संबंधों से ‘हमारे लोगों को बहुत लाभ मिलेगा।’
पांच साल में रूस की पहली यात्रा
यह पिछले पांच साल में मोदी की रूस की पहली यात्रा है। यह फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद उनकी पहली मॉस्को यात्रा है। यह पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल की पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा भी है। इससे पहले वह 2019 में रूस गए थे जहां उन्होंने पूर्वी शहर व्लादिवोस्तक में एक आर्थिक सम्मेलन में भाग लिया था।
दौरे के एजेंडे में ये मुद्दे
पीएम अपनी रूस यात्रा के दौरान व्लादिमीर पुतिन के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा, यूक्रेन-रूस युद्ध, रक्षा, तेल और गैस, द्विपक्षीय संबंध, व्यापार और ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों पर बात करेंगे। इससे पहले रविवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पीएम मोदी की यह यात्रा राष्ट्रपति पुतिन के साथ व्यापार पर सीधी बातचीत करने का शानदार अवसर है। उन्होंने कहा, व्यापार असंतुलन जैसे कुछ मुद्दे हैं…इसलिए, जाहिर है कि नेतृत्व स्तर पर यह बैठक महत्वपूर्ण साबित होगी। क्योंकि उनके निर्देशों के अनुसार ही हम देखेंगे कि रिश्ते को कैसे आगे बढ़ाया जाए।
22वें भारत-रूस वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन पर विदेश मंत्री ने कहा कि यह अच्छी परंपरा है। लेकिन ऐसे शिखर सम्मेलनों में कुछ कमी आई है। दोनों नेताओं के बीच रूस पर प्रतिबंधों के चलते भुगतान मुद्दा हल करने, रक्षा हार्डवेयर की आपूर्ति, प्रस्तावित चेन्नई-व्लादिवोस्तोक मैरिटाइम कॉरिडोर में निवेश पर चर्चा के अलावा यूक्रेन में रूस की ओर से लड़ रहे भारतीयों के संवेदनशील मुद्दे पर भी बातचीत संभव है।







