फरीदाबाद। सेक्टर-आठ थाना से 32 लाइसेंसी हथियार चोरी के मामले में गिरफ्तार आइटीआई छात्र से पूछताछ के दौरान पुलिस के सामने एक ऐसा राज खुला, जिसने पूरे मामले को सनसनीखेज बना दिया। हथियार चोरी के मुख्य आरोपित गांव करनेरा निवासी मोनू ने पूछताछ में कबूल किया कि उसने करीब एक वर्ष पहले अपने चचेरे भाई 19 वर्षीय शिवम की हत्या कर शव गुरुग्राम नहर में फेंक दिया था। जिस युवक को परिवार पिछले एक साल से जिंदा समझकर तलाश रहा था, वह उसी दिन मौत के घाट उतार दिया गया था।
नहर में नहीं मिला शव
पुलिस के अनुसार शिवम 9 जुलाई 2025 को लापता हुआ था। स्वजन ने सेक्टर-58 थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। अब हथियार चोरी के मामले में सख्ती से पूछताछ होने पर मोनू ने हत्या की पूरी कहानी उगल दी। उसकी निशानदेही पर शिवम की चप्पल बरामद हुई है। हालांकि नहर में शव की तलाश के बावजूद अब तक कुछ नहीं मिला है।
पूछताछ में सामने आया कि मोनू को शक था कि शिवम उसकी गर्लफ्रेंड सरिता पर गलत नजर रखता है। सरिता ने भी यही बात मोनू को बताई थी। इसके बाद दोनों ने मिलकर शिवम को रास्ते से हटाने की साजिश रची। जिस दिन घर में कोई नहीं था, उस दिन सरिता ने शिवम को अपने घर बुलाया।
उसे चाय में नींद की गोली मिलाकर पिला दी। बेहोश होने के बाद दोनों ने गला दबाने और तकिए से मुंह दबाकर उसकी हत्या कर दी। देर रात शव को मोटरसाइकिल पर बीच में रखकर गुरुग्राम नहर में फेंक आए। पुलिस ने इस मामले में सरिता को भी गिरफ्तार कर लिया है।
पहले ही जताई थी मोनू पर हत्या की आशंका
मृतक के बड़े भाई विशाल का कहना है कि शिवम के लापता होने के समय से ही परिवार को मोनू पर शक था। उन्होंने गुमशुदगी दर्ज कराते समय पुलिस को यह आशंका भी बताई थी, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। उस समय मोनू सेक्टर-आठ थाने में अप्रेंटिसशिप कर रहा था।
आरोप है कि उसने वहां के पुलिसकर्मियों से सेक्टर-58 थाना पुलिस के पास फोन करवा दिया था, जिसके बाद उनकी शिकायत पर अपेक्षित गंभीरता से जांच नहीं हुई। परिवार का कहना है कि यदि उस समय संदेह के आधार पर गहराई से जांच होती तो हत्या का पर्दाफाश एक साल पहले ही हो सकता था और उन्हें अपने बेटे के बारे में सच्चाई जानने के लिए इतना लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता।







