गुरुग्राम। दिल्ली के हौजरानी इलाके में ”फ्लोरिश स्टे” नाम से चल रहे अवैध होटल में आग लगने से जिंदा जले सीए विवेक अग्रवाल सहित उनके परिवार के पांच लोगों के शव आते ही इलाके का माहौल गमगीन हो गया। वहीं, कुछ ही देर में सैकड़ों लोग पहुंचे गए। सभी की आंखें नम थीं। ऐसे काफी लोग पहुंचे जिनका पीड़ित परिवार से कोई संबंध नहीं। किसी की जुबान पर कोई शब्द नहीं था। सभी एक-दूसरे को टकटकी लगाए देखते रहे।
इसके बाद जब अंतिम यात्रा निकली, महिलाओं के क्रंदन से ऐसा लगा मानो धरती का सीना फट जाएगा। ढांढस बंधाने वाले भी फूट-फूट कर रोने लगे। आसपास के भवनों में काम करने वाले लोग भी अपने आंसू नहीं रोक सके।
दिल्ली में जुटा था पूरा परिवार
सीए विवेक अग्रवाल अपने पिता राधेश्याम अग्रवाल, माता हेमलता अग्रवाल, पत्नी तर्जनी अग्रवाल, बड़ी बेटी जीविशा एवं छोटी बेटी वारिया के साथ पिछले लगभग दो साल से सेक्टर-46 में रह रहे थे। उनके पिता राधेश्याम अग्रवाल गंभीर रूप से बीमार चल रहे हैं। उन्हें देखने के लिए पूरा परिवार व रिश्तेदार दिल्ली में मंगलवार रात जुटा था। बुधवार सुबह होटल में आग लग गई। जिसमें विवेक अग्रवाल सहित उनके परिवार के पांचों सदस्य जिंदा जल गए। पोस्टमार्टम के बाद बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे सभी के शव अलग-अलग एंबुलेंस से आवास पर लाए गए। कुछ देर तक किसी की हिम्मत ही नहीं हुई एंबुलेंसों से शवों को बाहर निकालने की।
अलग-अलग एंबुलेंस से निकली अंतिम यात्रा
एक बुजुर्ग रिश्तेदार एंबुलेंस के नजदीक पहुंचते ही इस तरह रोने लगे कि कई लोगों को उन्हें संभालना पड़ा। काफी महिलाएं कुछ मिनट से अधिक देर तक शवों के नजदीक रुक नहीं सकीं। वह रोती हुईं बाहर निकल गईं। युवाओं ने आगे बढ़कर अंतिम यात्रा की शुरू कराई। अंतिम यात्रा भी अलग-अलग एंबुलेंस से निकाली गई। यात्रा निकलने के दौरान कोई ऐसा नहीं था जिसकी आंखें नम नहीं थीं।
सेक्टर-46 स्थित घर से लेकर सेक्टर-38 स्थित शमशान स्थल तक दोनों तरफ जगह-जगह काफी संख्या में लोग दोनों हाथ जोड़े खड़े दिखे। सेक्टर-38 शमशान स्थल के आसपास काफी संख्या में कारपोरेट कार्यालय हैं।
एंबुलेंस आने की लगातार आवाज सुन कारपोरेट कार्यालयों में काम करने वाले लोग भी सड़क के किनारे पहुंच गए। नाम न छापने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों ने कहा कि कोरोना के बाद पहली बार ऐसा माहौल देखा। मुखाग्नि चचेरे भाइयों महेंद्र अग्रवाल, दीपक अग्रवाल आदि ने दी।
पूरे शहर में अग्निकांड की चलती रही चर्चा
बृहस्पतिवार को शहर में हर जगह लोग एक वंश के समाप्त होने की चर्चा करते रहे। चाय की दुकानों पर भी यही चर्चा चलती रही। सभी व्यवस्था को कोसते दिखे। लोगों का कहना है कि इस घटना के बाद प्रशासन को चेत जाना चाहिए। मेदांता के सामने व आसपास के इलाकों में सैकड़ों गेस्ट हाउस एवं पीजी बने हुए हैं।







