नई दिल्ली। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिप्री) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पहली बार शांतिकाल में 12 परमाणु हथियारों को तैनात किया है। यह कदम भारत की परमाणु नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
सिप्री की रिपोर्ट में भारत के परमाणु हथियारों पर बड़ी जानकारियां सामने आई हैं। सिप्री की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के पास अब कुल 190 परमाणु हथियार हैं, जबकि एक वर्ष पहले यह संख्या 180 थी। इनमें से 12 हथियार तैनात माने गए हैं। यह पहली बार है जब वैश्विक हथियार निगरानी संस्था ने भारत के परमाणु भंडार के किसी हिस्से को केवल भंडारित रखने के बजाय परिचालन रूप से तैनात श्रेणी में रखा है।
पहली बार की सीमा पर परमाणु हथियारों की तैनाती : सिप्री की रिपोर्ट का हवाला देते हुए भारत के परमाणु हथियारों की तैनाती का दावा कई मीडिया रिपोर्ट्स में किया गया है। सिप्री की रिपोर्ट में कहा गया है, “लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि भारत शांतिकाल में अपने परमाणु हथियारों को तैनात प्रक्षेपण प्रणालियों से अलग रखता है। हालांकि, मिसाइलों को कैनिस्टर में रखने और समुद्र आधारित प्रतिरोधक गश्त संचालित करने की हालिया पहल से संकेत मिलता है कि भारत शांतिकाल में कुछ परमाणु हथियारों को उनके प्रक्षेपण साधनों के साथ जोड़ने की दिशा में बढ़ सकता है।”
सिप्री के पिछले वार्षिक आकलनों में भारत के पास कोई भी तैनात परमाणु हथियार नहीं दर्शाया गया था। ताजा रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 तक भारत के पास 12 तैनात और 178 भंडारित परमाणु हथियार हैं। इस प्रकार उसका कुल सैन्य परमाणु भंडार 190 हथियारों का हो गया है।
एसएसबीएन पनडुब्बियों की भी तैनाती की शुरुआत : रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने संभवतः कभी-कभार प्रतिरोधक गश्त पर जाने वाली एक परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) पर सीमित संख्या में परमाणु हथियार तैनात करने की शुरुआत की है। यह आकलन ऐसे समय आया है, जब भारत अपने समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक तंत्र को लगातार मजबूत कर रहा है, जिसे परमाणु त्रिस्तरीय क्षमता का सबसे सुरक्षित हिस्सा माना जाता है।
भारत ने अगस्त 2024 के बाद से दो परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों, आईएनएस अरिघाच और आईएनएस अरिदमन को परिचालन में शामिल किया है। यह दोनों ही पनडुब्बियां परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। SSBN यानी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां आमतौर पर लंबे समय तक पानी के भीतर रहकर प्रतिरोधक गश्त करती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य परमाणु हमले की स्थिति में विश्वसनीय जवाबी हमला करने की क्षमता सुनिश्चित करना होता है।
चीन के खिलाफ भारत बना रहा क्या योजना? : रिपोर्ट में भारत के व्यापक परमाणु आधुनिकीकरण कार्यक्रम का भी जिक्र किया गया है। सिप्री ने कहा, “माना जाता है कि भारत ने 2025 में एक बार फिर अपने परमाणु भंडार में मामूली वृद्धि की है और नए प्रकार की परमाणु हथियार प्रक्षेपण प्रणालियों के विकास को जारी रखा है।”
सिप्री के अनुसार भारत का हथियारों और सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम अब लंबी दूरी की उन प्रणालियों के विकास पर अधिक केंद्रित है, जो चीन के पूरे क्षेत्र में स्थित लक्ष्यों तक पहुंच सकें। हालांकि इसकी रणनीतिक योजना पर पाकिस्तान के साथ लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता का प्रभाव बना हुआ है।







