न्यूयॉर्क। ईरान के साथ पांच महीने से जारी युद्ध ने अमेरिका के सबसे अहम हथियार भंडार पर बड़ा दबाव डाल दिया है। अमेरिकी सेना अपनी अत्यधिक सटीक और लंबी दूरी तक मार करने वाली एटीएसीएमएस और प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल (पीआरएसएम) का लगभग पूरा परिचालन भंडार इस्तेमाल कर चुकी है। इससे भविष्य में किसी नए सैन्य संघर्ष की स्थिति में अमेरिका की तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
तीन सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी सेना ने इन मिसाइलों का लगभग पूरा स्टाक इस्तेमाल कर लिया है। वहीं, एक अन्य सूत्र के मुताबिक, युद्ध के दौरान अमेरिका अपने टॉमहॉक क्रुज मिसाइलों के वैश्विक भंडार का भी करीब आधा हिस्सा खर्च कर चुका है। हालांकि इन हथियारों की वास्तविक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एटीएसीएमएस और पीआरएसएम जैसी मिसाइलें दुश्मन की मजबूत वायु रक्षा प्रणाली से सुरक्षित दूरी बनाकर सटीक हमला करने में बेहद अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में इनका तेजी से कम होता भंडार भविष्य में रूस या चीन जैसे शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ अमेरिका की सैन्य क्षमता को प्रभावित कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, लंबी दूरी की मिसाइलों का अधिक इस्तेमाल इसलिए भी किया गया, ताकि पायलट वाले लड़ाकू विमानों को जोखिम भरे अभियानों में कम भेजना पड़े। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पैट्रियट इंटरसेप्टर और थाड जैसी मिसाइल रोधी प्रणालियों का भंडार भी तेजी से घटा है।
सेंटर फार स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के हालिया आंकलन के अनुसार, फरवरी से जुलाई के बीच पैट्रियट इंटरसेप्टर का करीब 65 प्रतिशत और थाड इंटरसेप्टर का लगभग 38 प्रतिशत स्टाक इस्तेमाल हो चुका है।
सूत्रों ने बताया कि ये आंकड़े अमेरिकी सरकार के आंतरिक आंकलन से भी मेल खाते हैं। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इन दावों को लेकर कहा कि अमेरिका के पास दुनिया के किसी भी देश से अधिक हथियार हैं और जितनी जरूरत है, उससे भी ज्यादा गोला-बारूद उपलब्ध है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी रक्षा कंपनियां रिकॉर्ड स्तर पर हथियारों का उत्पादन कर रही हैं और उत्पादन क्षमता का लगातार विस्तार किया जा रहा है। वहीं, पेंटागन ने भी कहा कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति के निर्देश पर किसी भी समय और किसी भी मोर्चे पर कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता और संसाधन मौजूद हैं।
ट्रंप प्रशासन के भीतर पिछले कुछ दिनों से इस बात पर चर्चा तेज है कि यदि ईरान के खिलाफ अभियान और लंबा चलता है, तो अमेरिका को अपने सीमित हथियार भंडार और अन्य संभावित वैश्विक संकटों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो सकता है। इसी कारण भविष्य की सैन्य रणनीति और हथियार उत्पादन को लेकर नई योजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।







