पूर्वी दिल्ली। वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी कर्मी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में कडक़डड़ूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार सिंह ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपितों को दोषी करार दिया, जबकि छह आरोपितों को बरी कर दिया। दोषी ठहराए गए आरोपितों में ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस शामिल हैं। वहीं, हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, समीर खान, फिरोज, गुलफाम, शोएब आलम उर्फ बॉबी और मुंतजिम उर्फ मूसा को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। दोषी ठहराए गए आरोपितों की सजा पर अदालत अलग से सुनवाई करेगी।
अदालत ने ताहिर हुसैन को सरकारी आदेश की अवहेलना, सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने, दंगा करने, घातक हथियार के साथ दंगा करने, अपहरण, हत्या तथा गैरकानूनी जमाव के साझा उद्देश्य से अपराध करने के आरोपों में दोषी ठहराया। हालांकि, उन्हें आपराधिक साजिश रचने और अपराध के लिए उकसाने के आरोपों से बरी कर दिया गया। नाजिम को भी सरकारी आदेश की अवहेलना, सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने, दंगा करने, घातक हथियार के साथ दंगा करने, अपहरण, हत्या तथा गैरकानूनी जमाव के साझा उद्देश्य से अपराध करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। कासिम, जावेद और अनस को भी दंगा, घातक हथियार के साथ दंगा, सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने, अपहरण, हत्या और गैरकानूनी जमाव के साझा उद्देश्य से अपराध करने के आरोपों में दोषी ठहराया गया।
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान आईबी कर्मी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़ा है। अंकित शर्मा का शव 26 फरवरी 2020 को चांदबाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि हिंसक भीड़ ने उनकी हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने प्रत्यक्षदर्शियों, फोरेंसिक साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार सिंह ने पांच आरोपितों को दोषी और छह को बरी करने का फैसला सुनाया। अब दोषी ठहराए गए आरोपितों की सजा पर अलग से सुनवाई होगी।
”दिल्ली दंगों के दौरान, हमारी मुख्य ज़िम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना और निष्पक्ष व सबूतों पर आधारित जांच सुनिश्चित करना था। विश्वसनीय साक्ष्य जुटाने और दोषियों को कानून के सामने लाने की हर संभव कोशिश की गई। कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद, मुझे इस बात का संतोष है कि जांच टीम की कड़ी मेहनत और पेशेवर रवैये ने न्यायिक जांच की कसौटी को सफलतापूर्वक पूरा किया है। हम 2020 के दंगों के दौरान हुए अपराधों के लिए ज़िम्मेदार सभी लोगों को कानून की उचित प्रक्रिया के जरिए सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
-सतीश गोलछा, दिल्ली पुलिस आयुक्त







