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कोरबा छत्तीसगढ़

कोतवाली सुर्खियों में… इधर सरेआम मर्डर उधर नशे में कोतवाली पहुंचकर युवक ने मचाया उत्पात

तोड़फोड़ के साथ रोजनामचा फाड़ने की कोशिश, महिला स्टॉफ से की अभद्रता, गिरफ्तार

कोरबा। कोरबा कोतवाली इन दिनों सुर्खियों में है। क्षेत्र में एक के बाद एक कांड हो रहे है। कानून व्यवस्था अस्त व्यस्त हो गई है। हाल ही में मर्डर के अलावा एक और संवेदनशील घटना सामने आई है। युवक नशे में धुत होकर कोतवाली पहुंचता है और उत्पात मचाते हुए  रोजनामचा फाड़ने की कोशिश करता है। यहां तक कि महिला स्टाफ के साथ भी अभद्रता की।

मिली जानकारी के अनुसार 29 जून को दोपहर लगभग 3 बजे थाना कोतवाली में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक कुंवर साय ड्यूटी पर उपस्थित थे। इसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति अत्यधिक मादक पदार्थ का सेवन कर नशे में थाना पहुंचा और बिना किसी कारण के हंगामा शुरू कर दिया। कथित आरोपी ने ड्यूटी पर उपस्थित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को मां-बहन की अश्लील गालियां दीं तथा जान से मारने की धमकी देते हुए शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाई।

महिला स्टाफ के साथ अभद्रता

आरोपी ने थाना के दस्तावेज इधर-उधर फेंक दिए और ड्यूटी पर मौजूद महिला आरक्षक सुनीता कश्यप तथा मोहर्रिर सुनीता डहरिया के साथ भी अश्लील गाली-गलौज की। उसने थाना के महत्वपूर्ण अभिलेख रोजनामचा को फाड़ने का प्रयास किया और टेबल का कांच तोड़कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

सिर और चेहरा दीवार पर पटकने लगा

एफआईआर के अनुसार कथित आरोपी का उत्पात यहीं नहीं रुका। वह स्वयं अपना सिर और चेहरा दीवार पर पटकने लगा। मददगार आरक्षक परमेश्वर सिंह, आरक्षक प्रदीप टेकाम और रविंद्र भारद्वाज ने उसे शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन उसने उनके साथ भी गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी।

घटना की सूचना थाना प्रभारी एमबी पटेल को दी गई, जो तत्काल मौके पर पहुंचे। उनके समझाने के बावजूद कथित आरोपी का व्यवहार नहीं बदला। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

एफआईआर दर्ज, जेल भेजा गया

पूछताछ में आरोपी की पहचान सीतामणी निवासी राजेश चौहान के रूप में हुई। सहायक उपनिरीक्षक कुंवर साय की रिपोर्ट पर कथित आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 132, 221, 296, 324(4), 351(3) एवं 355 के तहत अपराध दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई है। उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

सिर्फ एक घटना नहीं, गंभीर चेतावनी

यह मामला केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। जिस थाना परिसर को कानून और सुरक्षा का केंद्र माना जाता है, वहां इस तरह की घटना होना समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और उससे पैदा हो रहे दुस्साहस की ओर इशारा करता है। यदि नशे की गिरफ्त में लोग पुलिस थाने तक में उत्पात मचाने का साहस कर रहे हैं, तो यह प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नशे के बढ़ते प्रभाव पर केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए प्रभावी नियंत्रण, जागरूकता अभियान और सामाजिक भागीदारी की भी आवश्यकता है, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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