नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की कथित मौजूदगी और ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग में खामियों पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और कानून मंत्रालय से जवाब मांगा है। साथ ही, बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग और डिजिटल सबूत साझा करने के लिए केंद्रीकृत आनलाइन व्यवस्था बनाने के सुझाव पर भी केंद्र का रुख स्पष्ट करने को कहा है।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. चंद्रन की पीठ ‘जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रेन अलायंस’ और ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि कई इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पोक्सो कानून के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। साथ ही, इन प्लेटफार्म पर ऐसे भुगतान वाले विज्ञापन भी मौजूद हैं, जो बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देते हैं।
केंद्रीकृत रिपोर्टिंग सिस्टम पर सरकार का रुख मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर तय करते हुए केंद्र से यह भी पूछा कि क्या ऐसा केंद्रीकृत ऑनलाइन सिस्टम बनाया जा सकता है, जिसके जरिए इंटरनेट मीडिया कंपनियां बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सीधे भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेज सकें और डिजिटल सबूत साझा कर सकें।







