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शिवलिंग पर किस धातु के लोटे से जल चढ़ाना है सबसे शुभ? जान लें जल अर्पित करने का सही नियम

सावन का नाम सुनते ही शिव भक्तों के चेहरों पर खुशियां झलकने लगती है। भगवान शिव की उपासना के लिए आतुर भक्तों का दिन बेहद करीब है। जी हां 30 जुलाई से सावन महीना लग रहा है और ये पवित्र महीना शिवलिंग की उपासना के लिए सबसे शुभ माना जाता है।

सनातन धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं जो भी व्यक्ति नियम से रोजाना शिवलिंग पर जल अर्पित करता है उसके जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।  इसी कारण से इस महीने में श्रद्धालु शिवलिंग पर खूब जल अर्पित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए कौन सी धातु का लोटा सबसे शुभ होता है। अगर नहीं जानते तो हमारा ये लेख आपकी सारी कंफ्यूजन दूर कर देगा।

जल चढ़ाने के इस पात्र का करें इस्तेमाल

  • तांबे का लोटा – शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए तांबे का लोटा सबसे शुभ माना जाता है क्योंकि तांबे को बेहद पवित्र धातु माना जाता है। कहते हैं तांबे के लोटे से जल चढ़ाने से भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं, साथ ही कुंडली में सूर्य और मंगल से जुड़े दोषों से राहत मिलती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि तांबे के लोटे से दूध कभी नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि तांबे में दूध दूषित या विषैला हो जाता है। अगर आप शिवलिंग पर दूध चढ़ा रहे हैं तो उसके लिए पीतल या चांदी के पात्र का प्रयोग करें।
  • चांदी का लोटा – तांबे के अलावा चांदी के लोटे से भी शिवलिंग पर जल चढ़ा सकते हैं। कहते हैं इससे कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है, जिससे घर में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति आती है।
  • पीतल का लोटा – तांबे और चांदी के अलावा आप पीतल के लोटे से भी जल या दूध चढ़ा सकते हैं।

इन चीजों से न चढ़ाएं जल

शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए लोहा, स्टील, प्लाटिक या कांच के बर्तनों का प्रयोग न करें। दरअसल ये सभी अशुद्ध धातुएं मानी जाती हैं।

शिवलिंग पर जल अर्पित करने के सही नियम

  • इस बात का ध्यान रखें कि जल अर्पित करते समय आपका मुख हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए।
  • शिवलिंग पर हमेशा बैठकर या फिर थोड़ा झुककर मन ही मन ‘ओम नम: शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए जल अर्पित करना चाहिए। एकदम सीधे खड़े होकर जल चढ़ाना अशुभ माना जाता है।
  • शिवलिंग पर जल हमेशा पतली और धीमी धार में चढ़ाएं।
  • ध्यान रखें कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल जिस रास्ते से बाहर निकलता है, उस स्थान को कभी लांघना नहीं चाहिए।

 

डिस्क्लेमरउक्त लेख धार्मिक आस्था लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए  Today Studio उत्तरदायी नहीं है।

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