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नेपाल में सैलाब से कितना नुकसान? तबाही का शुरुआती भयावह आंकड़ा आया सामने

  • 55 किमी सड़क और 33 पुल पूरी तरह तबाह
  • 7,570 निजी भवन और 4,800 कारोबारी प्रतिष्ठान क्षतिग्रस्त
  • 1,806 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित, 68 सस्पेंशन ब्रिज भी क्षतिग्रस्त

काठमांडू।  26 अगस्त को  तिब्बत के रास्ते नेपाल में आए सैलाब में कितना नुकसान हुआ है, इसका एक शुरुआती आकलन सामने आया है। इस तबाही ने नेपाल की जड़ें हिलाकर रख दी है। जहां एक ओर अभी भी शवों का मिलना जारी है वहीं सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान का एक प्रारंभिक आंकड़ा संसदीय समिति में पेश किया।

बताया गया कि चीन नाका से व्यापार पूरी तरह से ठप हो गया है जिससे राजस्व पर बड़ा असर पड़ा है। वहीं इस रिपोर्ट में सड़क, पुल, स्कूल, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से लेकर अन्य नुकसान की डिटेल्स भी दी गई है।

नेपाल वित्त मंत्रालय की ओर से इस रिपोर्ट में बताया गया कि रसुवा में आई विनाशकारी बाढ़ और कृष्णभीर में सड़क धंसने से उत्तरी बॉर्डर से होने वाली सप्लाई बाधित हुई है। वित्त सचिव डॉ. घनश्याम उपाध्याय ने बताया कि रसुवागढ़ी सीमा नाके पर बाढ़ के कारण चीन से होने वाली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई थी। इसके चलते सीमा शुल्क के राजस्व पर बड़ा असर पड़ा है।

चीन से सप्लाई रूट बाधित

प्रतिनिधि सभा की वित्त समिति की बैठक में उपाध्याय ने कहा कि रसुवागढ़ी के विकल्प के तौर पर आयात को सुचारु करने के लिए सरकार ने कोराला सीमा नाके पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की थी। लेकिन कृष्णभीर में सड़क धंसने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई तथा सप्लाई रूट भी बाधित हो गया।

सड़क का 55 किलोमीटर हिस्सा पूरी तरह नष्ट

उपाध्याय ने बताया कि बाढ़ में बेत्रावती-रसुवागढ़ी सड़क का 55 किलोमीटर हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया है। वहीं गल्छी–देवीघाट सड़क के चार किलोमीटर हिस्से की पक्की सड़क को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसी तरह 10 किलोमीटर लंबी देवीघाट–त्रिशूली–बेत्रावती सड़क को भी आंशिक क्षति पहुंची है।

33 पुल पूरी तरह से नष्ट

इस भीषण आपदा का पुलों पर भी भारी असर पड़ा है। उपाध्याय ने बताया कि चार जिलों में 33 पुल पूरी तरह से नष्ट हो गए, जबकि चार अन्य पुलों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 68 सस्पेंशन ब्रिज भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि क्षतिग्रस्त मोटर चलने योग्य पुलों की कुल लंबाई करीब 3,000 मीटर है।

12 बैंकों की 17 ब्रांच तबाह

परिवहन के अलावा अन्य क्षेत्रों पर भी आपदा का व्यापक असर पड़ा है। वित्त सचिव के अनुसार, वित्तीय क्षेत्र में 12 बैंकों की 17 शाखाएं पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुई हैं। आपदा से करीब 4,800 व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी पूरी तरह नष्ट  हुए हैं।

स्कूलों के 56 भवन पूरी तरह नष्ट

उन्होंने बताया कि शिक्षा क्षेत्र को भी बड़ा नुकसान हुआ है। 26 अगस्त को आए सैलाब में 18 स्कूलों के 56 भवन पूरी तरह नष्ट हो गए, जिनमें कुल 308 कक्षाएं थीं।

7,570 प्राइवेट बिल्डिंग्स तबाह

वित्त सचिव के मुताबिक कुल 7,570 निजी भवन पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं 48 सरकारी भवनों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से 35 पूरी तरह नष्ट हो गए।

13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर असर

कृषि क्षेत्र में भी नुकसान हुआ है। बाढ़ से 1,806 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि प्रभावित हुई है। उपाध्याय ने बताया कि 13 जलविद्युत परियोजनाएं और 25 सिंचाई परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।

विस्तृत आकलन के अनुसार, बाढ़ से 1,259 होटल और रेस्तरां, 1,212 थोक एवं खुदरा कारोबार तथा बिजली, गैस और पानी से संबंधित 345 परियोजनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इसी तरह 263 विनिर्माण उद्योग और सेवा क्षेत्र से जुड़ी 227 गतिविधियां भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। वित्त सचिव उपाध्याय ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री राहत कोष में नेपाल के भीतर और विदेशों से लगातार आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रहा है।

बता दें कि नेपाल के चिलिमे इलाके में टनल में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने  टनल के अवरुद्ध हिस्से तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक एक्सेस रूट तैयार करने का काम तेज कर दिया है।

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