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जब 56 भोग से भी नहीं भरा हनुमान जी का पेट, तो माता सीता ने दिया खास पत्ता, खाते ही तृप्त हुए पवनपुत्र

इस साल 2 अप्रैल 2026 को हनुमान जन्मोत्सव (Hanuman Janmotsav 2026) मनाया जाएगा।  श्रीराम भक्त हनुमान जी को तुलसी का भोग लगाना काफी पुण्यकारी माना गया है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी मिलती है, जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

क्या आप जानते हैं कि एक बार पवनपुत्र की भूख इतनी बढ़ गई थी कि अयोध्या के सारे भंडार खाली हो गए थे, लेकिन उनका पेट नहीं भरा था। अंत में माता सीता ने उन्हें एक खास पत्ता खाने को दिया जिससे हनुमान जी तृप्त हो गए थे।

ये खास पत्ता कोई और नहीं तुलसी का था, जिसे भगवान हनुमान जी की पूजा में जरूर शामिल किया जाता है। कहते हैं इसके बिना बजरंगबली की पूजा पूरी नहीं होती, इसलिए भक्त हनुमान जी को भोग स्वरूप तुलसी जरूर अर्पित करते हैं। कहते हैं जो भी श्रद्धालु हनुमान जी को तुलसी दल चढ़ाता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। चलिए जानते हैं ये पत्ता भगवान हनुमान का प्रिय कैसे बना?

जब 56 भोग भी पड़ गए कम :  ये पौराणिक कथा उस समय की है जब भगवान राम अयोध्या वापस लौट आए थे। एक दिन हनुमान जी को माता सीता ने सभी के साथ भोजन करने के लिए कहा। माता सीता ने हनुमान जी के लिए अनेक प्रकार के छप्पन भोग और स्वादिष्ट पकवान तैयार किए थे। हनुमान जी भोजन करने बैठे और देखते ही देखते सारा भोजन समाप्त हो गया, लेकिन फिर भी भूख शांत नहीं हुई। माता सीता ने फिर से भोजन बनवाया, लेकिन हनुमान जी उसे भी खा गए और अब भी उनकी भूख शांत नहीं हुई । धीरे-धीरे स्थिति यह आ गई कि महल के सारे अन्न भंडार खाली होने लगे। माता सीता चिंतित हो गईं कि हनुमान जी की भूख कैसे शांत की जाए।

तब माता सीता ने राम जी से उनके भक्त हनुमान की भूख शांत करने का उपाय पूछा। उपाय जानने के बाद माता सीता ने एक तुलसी का पत्ता लिया और उस पर राम नाम लिख दिया। जैसे ही हनुमान जी ने ये पत्ता खाया उनकी भूख तुरंत शांत हो गई। तब माता सीता समझ गईं कि ये भूख खाने की नहीं, बल्कि श्रीराम की भक्ति की भूख थी। कहते हैं तभी से ऐसी मान्यता चली आ रही है कि हनुमानजी को तुलसी अर्पित करने से उनकी शीघ्र ही कृपा प्राप्त हो जाती है।

 

डिस्क्लेमरउक्त लेख धार्मिक आस्था लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए  Today Studio उत्तरदायी नहीं है।

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