सावन का दूसरा सोमवार कल यानी 21 जुलाई को है। इसके बाद 23 जुलाई को शिवरात्रि है। श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस साल यह पावन महीना 11 जुलाई से प्रारंभ हो चुका है और 9 अगस्त तक चलेगा। इस अवधि में भक्तगण हर दिन शिवजी की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। जलाभिषेक, मंत्र जाप, व्रत और विविध प्रकार के फल-फूलों से शिव की आराधना की जाती है।
माना जाता है कि भगवान शिव जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। यदि सच्चे मन से केवल जल अर्पित किया जाए, तो भोलेनाथ वह भी स्वीकार कर लेते हैं। शिव जी को सामान्य प्रसाद प्रिय है, लेकिन कुछ फल ऐसे भी हैं, जिन्हें उनकी पूजा में अर्पित करना वर्जित माना जाता है।
नारियल- नारियल समुद्र मंथन की प्रक्रिया से उत्पन्न हुआ था और इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। चूंकि लक्ष्मी जी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं, इसलिए नारियल चढ़ाना शिव को लक्ष्मी अर्पित करने जैसा माना जाता है, जो पूजा शास्त्रों के अनुसार अनुचित है।
केला- पुराणों में वर्णन मिलता है कि केले के वृक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के रौद्र रूप और ब्राह्मण के शाप के कारण हुई थी। यही कारण है कि केले को शिवजी को अर्पित नहीं किया जाता।
अनार- शिवलिंग पर संपूर्ण अनार चढ़ाना वर्जित है। हालांकि श्रद्धापूर्वक अनार के रस से अभिषेक करना स्वीकार्य माना गया है।
जामुन- धार्मिक दृष्टिकोण से जामुन को पूरी तरह से शुद्ध नहीं माना गया है। इसी वजह से इसे शिवलिंग या शिव प्रतिमा पर नहीं चढ़ाया जाता और न ही इसे प्रसाद के रूप में अर्पित किया जाता है।
इन चीजों से भी करें परहेज- इन फलों के अलावा तुलसी के पत्ते और केवड़ा फूल भी भगवान शिव को नहीं चढ़ाए जाते। शिवपुराण के अनुसार केवड़ा फूल को शिव ने श्रापित किया था क्योंकि इसने ब्रह्मा जी के असत्य कथन का समर्थन किया था। साथ ही, शिव वैराग्य और तप के प्रतीक हैं, इसलिए उन्हें कुमकुम, सिंदूर या स्त्रियों के श्रृंगार संबंधी वस्तुएं भी नहीं अर्पित करनी चाहिए। ऐसी वस्तुएं शिव पूजा के प्रभाव को कम कर सकती हैं।
डिस्क्लेमर : ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Today Studio उत्तरदायी नहीं है।







