Home » हनुमान जयंती कब? जान लें सही तारीख, शुभ मुहूर्त व पूजा विधि
धर्म

हनुमान जयंती कब? जान लें सही तारीख, शुभ मुहूर्त व पूजा विधि

Hanuman Jayanti : हनुमान जयंती का पावन पर्व चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। यही कारण है कि इस पर्व को हनुमान जन्मोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। आंध प्रदेश और तेलंगाना में तो ये त्योहार पूरे 41 दिनों तक मनाया जाता है। हनुमान जयंती पर भक्त बजरंगबली की विधि-विधान पूजा करते हैं और उनकी चालीसा का पाठ करते हैं। साथ ही मंदिर दर्शन के लिए जाते हैं। चलिए जानते हैं इस साल हनुमान जयंती कब मनाई जाएगी।

कब है हनुमान जन्मोत्सव 2026 ?

  • पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल 2026 को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी।
  • इस तिथि का समापन 2 अप्रैल 2026 को सुबह 7 बजकर 41 पर हो रहा है।
  • उदया तिथि के मुताबिक, हनुमान जन्मोत्सव का पर्व 2 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा।

पूजा मुहूर्त 

  • ब्रह्म मुहूर्त 04:38 AM से 05:24 AM
  • प्रातः सन्ध्या 05:01 AM से 06:10 AM
  • अभिजित मुहूर्त 12:00 PM से 12:50 PM
  • विजय मुहूर्त 02:30 PM से 03:20 PM
  • गोधूलि मुहूर्त 06:38 PM से 07:01 PM
  • सायाह्न सन्ध्या 06:39 PM से 07:48 PM
  • अमृत काल 11:18 AM से 12:59 PM

 पूजा विधि 

  • हनुमान जयंती के दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर लाल वस्त्र पहनें।
  • फिर एक लकड़ी की चौकी पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाएं।
  • इस पर हनुमानजी की तस्वीर को विराजमान करें।
  • भगवान को माला पहनाएं और फूल अर्पित करें।
  • घी का दीप प्रज्वलित करें और अगरबत्ती जलाएं।
  • इसके बाद विधा विधान पूजा करें।
  • फिर भगवान को सिंदूर, चंदन और चमेली का तेल लगाएं।
  • इसके पश्चात श्रद्धा भाव से हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • अब आप गुड़-चना और पान का बीड़ा चढ़ाएं।
  • अंत में आरती करें और सभी में प्रसाद बांट दें।

हनुमान जी की आरती 

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।

अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुधि लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

पैठी पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे।
बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संत जन तारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

डिस्क्लेमरउक्त लेख धार्मिक आस्था लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए  Today Studio उत्तरदायी नहीं है।

Search

Archives