चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है और इस दिन को महानवमी के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 27 मार्च के दिन सिद्धिदात्री माता की पूजा के साथ समाप्त हो जाएगा। इस दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करनी है, पूजन की विधि क्या है और किन मंत्रों के जप से आप माता सिद्धिदात्री को प्रसन्न कर सकते हैं, आइए जानते हैं। इससे पहले आपको बता दें आज नवरात्र का आठवां दिन यानी महाष्टमी है, वहीं कल महानवमीं होगी।
महानवमी पूजा विधि
- नवरात्रि के आखिरी दिन यानि महानवमी को सुबह जल्दी उठकर आपको स्नान ध्यान करना चाहिए।
- इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा स्थल की भी सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें।
- इसके बाद पूजा स्थल पर बैठकर पूजा के स्थान पर माता सिद्धिदात्री की फोटो या प्रतिमा आपको स्थापित करनी चाहिए।
- इसके बाद माता के समक्ष धूप-दीप आपको जलाना चाहिए।
- अब मां सिद्धिदात्री का कुमकुम, रोली और अक्षत से तिलक करें।
- माता को लाल फूल (गुड़हल) आपको अर्पित करना चाहिए।
- इसके बाद माता को हलवा, पूरी, चना, खीर आदि भी आपको अर्पित करना चाहिए।
- पूजा के दौरान माता के मंत्रों का जप करें और साथ ही दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- इसके बाद अंत में माता की आरती करें और फिर कन्या पूजन शुरू करें।
- कन्याओं के पैर धुलाकर उन्हें आसान पर बैठाकर हलवा, पूरी, खीर, चना आदि खिलवाएं।
- इसके बाद उनके हाथों को स्वच्छ करवाएं और फिर उनसे आशीर्वाद लें।
- कन्याओं को विदा करने से पहले उनको यथासंभव उपहार भी अवश्य दें।
- अंत में खुद भी प्रसाद ग्रहण करके नवरात्रि पूजन की समाप्ति करें।
महानवमी पूजा का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त 05:03 ए एम से 05:50 ए एम
- प्रातः सन्ध्या 05:26 ए एम से 06:37 ए एम
- अभिजित मुहूर्त 12:19 पी एम से 01:08 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त 06:50 पी एम से 07:13 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या 06:51 पी एम से 08:02 पी एम
डिस्क्लेमर : उक्त लेख धार्मिक आस्था व लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Today Studio उत्तरदायी नहीं है।







