ग्वालियर। दिल्ली से ग्वालियर आ रही दक्षिण एक्सप्रेस के एस-टू कोच में सफर कर रहे झांसी (उप्र) की निजी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर व बीकानेर (राजस्थान) निवासी रणजीत सिंह यादव (58) को दिल का दौरा पड़ गया। उनके साथ सफर कर रहे कुछ छात्रों ने एंबुलेंस से लेकर रेलवे की तमाम हेल्पलाइन पर मदद मांगी। एंबुलेंस के इंतजार में ही उनकी सांसें ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर उखड़ने लगी थीं। अपने सामने दम तोड़ रहे शिक्षक को छात्र देख न सके और गुस्से में रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म-एक के बाहर पोर्च में खड़ी हाई कोर्ट जज संजीव एस. कालगांवकर के ड्राइवर से कार छीन बैठे। इसी गाड़ी से छात्र उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। सिस्टम की नाकामी ने जान ले ली थी।
उधर, जज की कार लूटने की सूचना के बाद पुलिस ने सोमवार सुबह करीब चार बजे नाकाबंदी की और अस्पताल को घेर लिया। करीब डेढ़ घंटे तक यहां हंगामा चलता रहा। जज की कार छीनने के मामले में जीआरपी की ओर से शिकायती आवेदन दिया गया, जिस पर पड़ाव थाने की पुलिस ने अज्ञात छात्रों पर लूट की एफआइआर दर्ज कर ली है।
सीएसपी इंदरगंज सर्किल अशोक सिंह जादौन ने बताया कि अभी छात्रों की पहचान नहीं हो सकी है। दिल्ली में शिक्षक और छात्रों के सम्मेलन में शामिल होकर सभी दक्षिण एक्सप्रेस से लौट रहे थे। छात्र दतिया व झांसी के रहने वाले थे। वाइस चांसलर रणजीत सिंह यादव सीट नंबर-नौ पर सफर कर रहे थे। ट्रेन जैसे ही आगरा पहुंची, उनकी तबीयत बिगड़ गई। पास में ही छात्रों की सीट थी। उन्होंने टीटीई को ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिला। मुरैना में तबीयत और अधिक बिगड़ गई। उनके सीने में दर्द हो रहा था। फिर एंबुलेंस को सूचना दी गई।
ग्वालियर स्टेशन पर रणजीत सिंह यादव को लेकर छात्र नीचे उतर गए। यहां कोई मदद के लिए नहीं आया। छात्र बाहर की तरफ भागे। पोर्च में हाई कोर्ट के जज की कार खड़ी थी। ड्राइवर से छात्रों ने अस्पताल चलने को कहा, लेकिन वह नहीं माना। इस पर छात्रों ने उससे चाबी छीन ली, और उसे धक्का देकर बाहर कर दिया। खुद कार में रणजीत सिंह यादव को डालकर अस्पताल ले गए। हालांकि, डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में छात्रों ने चाबी और कार लौटाने से इंकार कर दिया था और करीब डेढ़ घंटे तक हंगामा करते रहे। उनकी इसी हरकत को लेकर जीआरपी के सिपाही राकेश सेंगर की ओर से शिकायत की गई। अगर छात्र हंगामा न करते और कार लौटा देते तो एफआइआर दर्ज नहीं होती।







