Home » सतरेंगा पर्यटन स्थल में स्थानीय आदिवासियों की उपेक्षा, विरोध प्रदर्शन शुरू
कोरबा

सतरेंगा पर्यटन स्थल में स्थानीय आदिवासियों की उपेक्षा, विरोध प्रदर्शन शुरू

कोरबा। सतरेंगा बोट क्लब एवं रिसॉर्ट का संचालन करने वाली कंपनी ने आदिवासियों की सेवा समाप्त कर दी है। सेवा समाप्त होने के बाद गरीब आदिवासी बेरोजगार हो गए हैं। इसे लेकर क्षेत्र के आदिवासियों में आक्रोश देखा जा रहा है। क्षेत्र के आदिवासियों ने 8 जून को सतरंेगा बोर्ड क्लब एवं रिसोर्ट को बंद कर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।
प्रदेश के साथ देश-विदेश में विशाल जल राशि क्षेत्र के कारण सतरेंगा ने पर्यटन के क्षेत्र में विशेष स्थान बनाया है। राज्य सरकार एक और लगातार सतरेंगा को बेहतर बनाने के प्रयास में जुटी है, वहीं दूसरी ओर इसमें अहम योगदान स्थानीय आदिवासी निभा रहे हैं, जो सतरेंगा बोट क्लब एवं रिसोर्ट में भरपूर सहयोग कर रहे हैं। चाहे अथाह जलराशि क्षेत्र में वोटिंग के दौरान पर्यटकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हो या फिर रिसोर्ट में उनकी सेवा का अवसर हो स्थानीय आदिवासी युवाओं का समूह इसमें पीछे नहीं रहा है। सतरंगा को खूबसूरत बनाने के लिए गार्डनिंग की जिम्मेदारी भी स्थानीय आदिवासियों ने निभाई है। सतरंेगा में बोट क्लब एवं रिसॉर्ट की शुरुआत से लेकर अब तक करीब 3 साल से सतरंेगा समेत आसपास के गांव में रहने वाले करीब 11 आदिवासी अपनी सेवा दे रहे हैं, लेकिन अब सतरेंगा बोट क्लब एवं रिसॉर्ट का संचालन करने वाली कंपनी ने उक्त आदिवासियों की सेवा समाप्त कर दी है। जिससे गरीब आदिवासी फिर से बेरोजगार हो गए हैं। इस कारण उक्त आदिवासियों के साथ ही स्थानीय ग्रामीण आक्रोशित हैं। उन्होंने 8 जून को सतरंेगा बोर्ड क्लब एवं रिसोर्ट को बंद कर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में पुलिस को भी सूचना दे दी गई है। एक और जहां प्रदेश सरकार वनांचल व ग्रामीण अंचल में रहने वाले आदिवासियों के उत्थान की बात कर रही है तो दूसरी ओर सतरेंगा में बोट क्लब एवं रिसोर्ट का संचालन करने वाली कंपनी उनकी उपेक्षा करते हुए काम से हटाकर अब आउटसोर्सिंग से वहां व्यवस्था संचालित करने की तैयारी में है। देखना होगा कि प्रशासन उक्त कंपनी के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई करती है और आदिवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन का हक दिलाती है।—-

Search

Archives