कोरबा। जिले के एक सरकारी दफ्तर में इन दिनों अजीबोगरीब फरमान चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां आने वाले फरियादियों और कर्मचारियों को पहले ही साफ निर्देश दे दिए जाते हैं कि वे अपना मोबाइल फोन बाहर ही जमा करें, तभी उन्हें अंदर जाकर अधिकारी से मिलने की अनुमति मिलेगी।
दरअसल एयूपीसी (ऐश यूटिलाइजेश पॉल्यूशन कंट्रोल) सीएसईबी के अधीक्षण अभियन्ता ने अपने चैम्बर के बाहर बोर्ड चस्पा करते हुए सरकारी ऑफिस में अपना खुद का कंडीशन लगा दिया है। जानकारों कि माने तो यह आदेश किसी सुरक्षा कारण से नहीं, बल्कि बातचीत की रिकॉर्डिंग के डर से लागू किया गया है। दफ्तर में आने वाले लोगों का कहना है कि कई बार वे अपनी समस्याएं रखने आते हैं, लेकिन फोन बाहर रखने की शर्त उन्हें असहज कर देती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, साहब को इस बात का डर सताता है कि कहीं उनकी बातचीत रिकॉर्ड न हो जाए और बाद में वही उनके लिए परेशानी का कारण बन जाए। यही वजह है कि उन्होंने यह “नो मोबाइल एंट्री” का नियम सख्ती से लागू कर रखा है।
कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दफ्तर के अंदर कामकाज के दौरान भी मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर सख्त निगरानी रहती है। इससे न सिर्फ काम प्रभावित होता है, बल्कि पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इधर, आम लोगों का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में इस तरह के नियम लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ हैं। उनका मानना है कि अगर कामकाज पारदर्शी हो, तो रिकॉर्डिंग का डर ही क्यों हो? मामला अब धीरे-धीरे चर्चा में आ रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन इस पर संज्ञान लेगा। सवाल सीधा है, अगर सब कुछ ठीक है तो फिर मोबाइल से इतनी दूरी क्यों?







