रूस ने ईरान में सीजफायर का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही अमेरिका और उसके सहयोगियों को आईना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मास्को मिडिल ईस्ट में ऐसी शांति चाहता है जो किसी एक की दादागिरी के बजाय क्षेत्र के सभी देशों के हितों के संतुलन पर आधारित हो।
रूस ने साफ कहा है कि War Is Not Over… यानी जंग अभी खत्म नहीं हुई है। रूस का मैसेज क्लियर है कि इस संकट का समाधान कभी भी सैन्य ताकत से संभव नहीं था और ईरान के खिलाफ अमेरिका का यह सैन्य अभियान इतिहास में जीत के रूप में नहीं, बल्कि एक करारी विफलता के रूप में दर्ज किया जाएगा।
रूस का मानना है कि पूरी जंग में नाटो (NATO), यूरोपीय यूनियन और ब्रिटेन की कमजोरी और लाचारी सामने आ गई है। रूस ने कहा कि जिस तरह से पश्चिमी ताकतें ईरान की घेराबंदी करने में नाकाम रहीं, उससे उनकी सैन्य हैसियत पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है। क्रेमलिन की नजर में पाकिस्तान में होने वाली अमेरिका-ईरान की बातचीत पर अभी से खुश होना जल्दबाजी होगी, क्योंकि जमीन पर हालात अभी भी विस्फोटक हैं। रूस की दो टूक चेतावनी यही है कि क्षेत्र में ‘युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है’ और खतरे की तलवार अब भी लटक रही है।
मास्को ने कमाया भारी मुनाफा : इस बीच अंतरराष्ट्रीय गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के इस टकराव से रूस को जबरदस्त आर्थिक फायदा हुआ है। चूंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई, इसलिए दुनिया के प्रमुख तेल और फर्टिलाइजर एक्सपोर्टर के रूप में रूस की मांग अचानक बढ़ गई। जब खाड़ी का रास्ता बंद हुआ, तो रूसी तेल और खाद की कीमतों ने आसमान छू लिया, जिससे मास्को की तिजोरी में भारी मुनाफा जमा हुआ। जानकारों का मानना है कि अमेरिका जिस ईरान को तबाह करने निकला था, उसकी वजह से अनजाने में उसने अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी रूस की आर्थिक ताकत को और बढ़ा दिया।
मिडिल ईस्ट की चाबी अब केवल वॉशिंगटन के पास नहीं : मास्को ने नाटो को उसकी औकात याद दिलाते हुए यह साफ कर दिया है कि मिडिल ईस्ट की चाबी अब केवल वॉशिंगटन के पास नहीं है और रूस की मर्जी के बिना वहां कोई भी पत्ता नहीं हिलेगा। इससे पहले रूस और चीन के वीटो ने साफ कर दिया था कि मिडिल ईस्ट के फैसले अब सिर्फ वॉशिंगटन में बैठकर नहीं होंगे। ईरान संकट ने नाटो की कमजोरी और ग्लोबल साउथ की बदलती वफादारी को उजागर किया है। अब तेहरान से होर्मुज तक, मॉस्को और बीजिंग की दखलअंदाजी ने अमेरिकी दबदबे को सीधी चुनौती दी है।







