नईदिल्ली। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के बहुचर्चित दवा और चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले में आरोपी पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल को मिली चार हफ्ते की अंतरिम जमानत को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। स्पेशल जज विद्या प्रकाश ने कहा कि आरोपी को जिन दवाईयों को खाने की सलाह दी गई है, वो जेल में भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि 18 अगस्त को कोर्ट ने चार हफ्ते का जो अंतरिम जमानत दिया था। उस अवधि के पूरा होने पर आरोपी जेल में सरेंडर करेंगी।
18 अगस्त को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही रकम के दो जमानतियों की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया था। इसके पहले कोर्ट ने 17 अगस्त को इस मामले के आरोपी डॉ विनोद कुमार रंगा की जमानत याचिका खारिज कर दिया था। इन दोनों आरोपियों को एंटी करप्शन ब्रांच ने गिरफ्तार किया था। दोनों पर दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीदी में 700 करोड़ रुपये की गड़बड़ी करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
सुनवाई के दौरान उस समय डॉ वत्सला अग्रवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रमेश गुप्ता ने कहा था कि वो पिछले 40 दिनों से जेल में है। याचिकाकर्ता को स्वास्थ्य की समस्याएं हैं जिसका जिक्र हिरासत के आदेश में भी किया गया। वकील रमेश गुप्ता ने यह भी कहा था कि वत्सला अग्रवाल को बलि का बकरा बनाया गया, ताकि कुछ उच्च पदस्थ लोगों को बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि वत्सला अग्रवाल के घर से कुछ भी बरामद नहीं हुआ। इस मामले में एंटी करप्शन ब्रांच ने सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर 2 जून को एफआईआर दर्ज किया था।
एफआईआर में दवाओं, सर्जिकल सामग्री और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में करीब सात सौ करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में कहा गया है कि दिल्ली के स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय और दिल्ली सरकार के सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी ने इस हेराफेरी को अंजाम दिया।







